राष्ट्रीय
03-Jun-2026


दो सीटों के लिए सियासी गणित हुआ दिलचस्प रांची,(ईएमएस)। आगामी 18 जून को देश की 24 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस कड़ी में झारखंड की भी दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना तय हुआ है। ये दोनों सीटें पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन और दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस बार ये दोनों सीटें इंडिया गठबंधन के खाते में जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इसमें से एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है, लेकिन कांग्रेस के हिस्से में दूसरी सीट आएगी या नहीं, इसे लेकर संशय बरकरार है। झारखंड विधानसभा के मौजूदा समीकरणों को देखें तो यहां कुल 81 विधायक हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 34 विधायक अकेले झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास हैं। सूबे में राज्यसभा की एक सीट पर फतह हासिल करने के लिए किसी भी प्रत्याशी को कुल 28 वोटों की आवश्यकता होगी। इस लिहाज से जेएमएम अपने दम पर एक सीट आसानी से निकाल लेगी। हालांकि, कांग्रेस के पास अपने दम पर एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए जरूरी संख्या बल मौजूद नहीं है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस को जेएमएम के अतिरिक्त बचे 6 विधायकों के साथ-साथ राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के 4 और भाकपा माले के 2 विधायकों के समर्थन की सख्त जरूरत पड़ेगी। यदि ये सभी दल कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करते हैं, तभी कांग्रेस की राह आसान होगी। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी भी एक सीट पर अपनी मजबूत दावेदारी ठोक रही है। बीजेपी का यह दावा उसके पास मौजूद 21 विधायकों और सहयोगी दलों जेडीयू, आजसू व लोजपा के एक-एक विधायकों को मिलाकर कुल 24 के संख्या बल पर आधारित है। बीजेपी को अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए केवल 4 और विधायकों के समर्थन की दरकार है। यदि विपक्षी खेमे से क्रॉस वोटिंग होती है, तो बीजेपी खेल बिगाड़ सकती है, हालांकि इसकी संभावना फिलहाल कम आंकी जा रही है। इस बीच, चुनावी रणनीतियों को धार देने के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह दिल्ली से लौट आए हैं। दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ प्रत्याशियों के चयन को लेकर गहन मंथन हुआ, जहां आलाकमान ने तीन अन्य संभावित चेहरों की सूची मांगी है। ये नाम ऐसे नेताओं के हैं जो संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं लेकिन मुख्य चुनावी राजनीति से दूर रहे हैं। पार्टी नेताओं ने साफ किया है कि किसी जमीनी कैडर को ही मैदान में उतारा जाएगा। बहरहाल, महागठबंधन में लंबी मशक्कत के बाद जेएमएम और कांग्रेस के बीच एक-एक सीट पर लड़ने की सहमति तो बन गई है, लेकिन असली चुनौती मतदान के दिन अपने कुनबे को एकजुट रखने की होगी। वीरेंद्र/ईएमएस/03जून2026