राष्ट्रीय
03-Jun-2026


भस्म आरती में शामिल हुए हजारों शिवभक्त उज्जैन,(ईएमएस)। ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की तृतीय तिथि पर विश्व प्रसिद्ध उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में आस्था का एक अनूठा सैलाब देखने को मिला। बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा मंदिर परिसर शिवभक्तों के गगनभेदी जयकारों से लगातार गुंजायमान हो उठा। बाबा की इस दिव्य भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए भक्तगणों ने मंगलवार देर रात से ही मंदिर के बाहर लंबी कतारों में लगना शुरू कर दिया था। रातभर लाइन में खड़े रहने के बाद भी सुबह तक श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी और हर कोई अपने आराध्य देव की एक झलक पाने को आतुर नजर आया। रोजाना की स्थापित परंपरानुसार, बुधवार सुबह तड़के वीरभद्र भगवान से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए। भस्म आरती के विशेष समय पर अपने आराध्य के साक्षात दर्शन कर सभी भक्त पूरी तरह भाव-विभोर हो गए। भक्तों ने हर-हर महादेव और जय महाकाल के जयकारों से पूरे वातावरण को शिवमय कर दिया। पूजन की शुरुआत में सबसे पहले बाबा महाकाल को पवित्र जल अर्पित कर उन्हें स्नान करवाया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से बने दिव्य पंचामृत से बाबा का पूर्ण विधि-विधान के साथ अभिषेक किया गया। इस दौरान गर्भगृह में चल रहे सस्वर मंत्रोच्चार से वातावरण में अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। अभिषेक की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद बाबा का विशेष राजसी शृंगार किया गया। बुधवार का दिन होने के कारण परंपरानुसार बाबा महाकाल को भगवान गणेश के अत्यंत मनोहर स्वरूप में सजाया गया। शृंगार के दौरान सबसे पहले उनके मुखारविंद को गणेश जी का सुंदर आकार दिया गया। इसके बाद उनके मस्तक पर आकर्षक त्रिशूल बनाया गया और उन्हें ताजे सुगंधित फूलों की सुंदर माला पहनाई गई। शृंगार के तुरंत बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती के मुख्य क्षणों में शंख, डमरू और घंटियों की तीव्र गूंज से पूरा गर्भगृह बेहद दिव्य और आध्यात्मिक केंद्र में बदल गया। यहाँ हर दिन बाबा की विशेष भस्म आरती के बाद उनका शृंगार अलग-अलग रूपों में किया जाता है। भस्म अर्पण के दौरान भगवान महाकाल निराकार रूप में माने जाते हैं, इसलिए इस विशेष समय पर महिलाओं को घूंघट करना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही, इस विश्वप्रसिद्ध आरती में शामिल होने वाले पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती और सोला (अंगवस्त्र) पहनना अनिवार्य है, जबकि महिलाओं के लिए केवल साड़ी पहनकर ही आरती में बैठने का नियम है। वीरेंद्र/ईएमएस/03जून2026