जिन्होंने बालेंद्र शाह को पीएम बनाया अब वही विरोध में खड़े हुए काठमांडू(ईएमएस)। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) के एक विवादास्पद बयान ने देश की राजनीति में जबरदस्त भूचाल ला दिया है। जिस युवा पीढ़ी और जेन-जी वोटर्स ने पिछले साल पारंपरिक राजनीतिक दलों के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा करके बालेन शाह को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाया था, आज वही युवा उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं और उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। काठमांडू सहित नेपाल के कई प्रमुख हिस्सों में उनके खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। देश के बड़े छात्र संगठनों के एक शक्तिशाली गठबंधन ने प्रधानमंत्री के इस बयान को सीधे तौर पर राष्ट्रविरोधी करार देते हुए राजधानी काठमांडू की सड़कों पर विशाल मशाल जुलूस निकाला है। इस भारी राजनीतिक विवाद की मुख्य वजह प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा संसद में भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर दिया गया एक बयान है। उन्होंने दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा सीमा विवाद पर बोलते हुए कहा कि जिस तरह भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, ठीक उसी तरह नेपाल ने भी भारत की जमीन दबा रखी है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले को सुलझाने के लिए ब्रिटेन और चीन जैसे तीसरे देशों से मदद लेने की वकालत भी कर डाली। प्रधानमंत्री के इस बयान ने नेपाल के राष्ट्रवादी खेमे और युवाओं को बुरी तरह भड़का दिया है। वहां के लोगों का मानना है कि पीएम का यह रुख नेपाल के पारंपरिक और संप्रभु क्षेत्रीय दावों को कमजोर करने वाला है। विपक्ष ने जहां संसद की कार्यवाही ठप कर दी है, वहीं छात्र संगठनों ने इसे नेपाल के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताते हुए प्रधानमंत्री को माफी मांगने या तुरंत इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है। दरअसल, युवाओं की यह नाराजगी सिर्फ इस बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी नींव इस साल की शुरुआत में ही पड़ गई थी। बालेन शाह सरकार ने अपने सुधारवादी एजेंडे के तहत देश के शैक्षणिक संस्थानों से छात्र राजनीति और छात्र संगठनों की गतिविधियों को सीमित करने का एक सख्त आदेश जारी किया था। छात्रों के विरोध के बाद यह मामला अदालत पहुंचा और नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी, जिससे सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। तभी से छात्र संगठन सरकार के खिलाफ मौके की तलाश में थे और पीएम के इस ताजा बयान ने जलती आग में घी का काम कर दिया। सीमा विवाद पर भारत सख्त कहा- तीसरे की जरुरत नहीं दूसरी तरफ, नेपाली प्रधानमंत्री के इस बयान पर भारत ने भी कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल के साथ सीमा विवाद के समाधान में किसी भी तीसरे पक्ष (चीन या ब्रिटेन) की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए पहले से ही मजबूत द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है और इसमें किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। भारत ने दोहराया है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी उत्तराखंड का अभिन्न हिस्सा हैं और दोनों देश आपसी बातचीत से सीमा से जुड़े लंबित मामलों को सुलझाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/04जून2026