-तमिलनाडु में भाजपा के लिए माना जा रहा बड़ा झटका चैन्नई,(ईएमएस)। तमिलनाडु की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी को एक बहुत बड़ा झटका लगा है, जहां पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का इस्तीफा आखिरकार भाजपा हाईकमान को स्वीकार करना पड़ा है। अन्नामलाई काफी समय पहले ही पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप चुके थे, जिस पर अब जाकर मुहर लगी है। लंबे समय तक तमिलनाडु में भाजपा का मुख्य चेहरा रहे अन्नामलाई की विदाई से राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, वे किस बात को लेकर सबसे ज्यादा असंतुष्ट थे, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के दौरान उनका यह असंतोष खुलकर सामने आया था। वे राज्य में एआईएडीएमके के साथ चुनावी गठबंधन करने के सख्त खिलाफ थे, जबकि केंद्रीय नेतृत्व ने अन्नाद्रमुक के साथ जाने का फैसला किया था। इस्तीफे की खबरों के बीच अन्नामलाई भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करने नई दिल्ली भी पहुंचे थे। इस दौरान जब उनसे नई पार्टी बनाने की संभावनाओं पर सवाल किया गया, तो उन्होंने सस्पेंस बरकरार रखते हुए कहा कि अगले कुछ दिनों में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा, लोग थोड़ा इंतजार करें। इसी बीच मदुरै और कोयंबटूर जैसे शहरों में उनके समर्थकों द्वारा पोस्टर भी लगाए गए, जिसमें उनसे तमिलनाडु को बचाने के लिए एक नया रास्ता चुनने की अपील की गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों को उम्मीद थी कि वे अपने जन्मदिन पर नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं, लेकिन तब ऐसा नहीं हुआ। अब इस्तीफा मंजूर होने के बाद एक बार फिर उनके द्वारा नई राजनीतिक जमीन तैयार करने की कयासबाजी तेज हो गई है। अन्नामलाई और भाजपा नेतृत्व के बीच मतभेद की सबसे बड़ी वजह एआईएडीएमके के साथ गठबंधन की नीति ही रही। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ा था, जहां पार्टी को 11.24 प्रतिशत वोट मिले थे लेकिन एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई। खुद अन्नामलाई भी कोयंबटूर सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बाद अप्रैल 2025 में भाजपा ने अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को जिम्मेदारी सौंप दी थी। चर्चा थी कि एआईएडीएमके के साथ संबंध सुधारने के लिए यह बदलाव किया गया था, क्योंकि अन्नामलाई के तीखे बयानों से अन्नाद्रमुक नेतृत्व असहज था। इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के दौरान भी महत्वपूर्ण निर्णयों में भूमिका सीमित किए जाने से वे बेहद असंतुष्ट थे और इसी वजह से उन्होंने चुनाव लड़ने में भी रुचि नहीं दिखाई थी। इसके अलावा स्कूलों में तीन भाषा नीति जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने केंद्र सरकार के रुख से अलग राय रखी थी, जिससे साफ था कि वे तमिलनाडु के क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी अलग राजनीतिक राह बनाना चाहते हैं। स्कूलों में तीन भाषा नीति सवाल इसके अलावा 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों की तैयारियों के दौरान भी अन्नामलाई की नाराजगी की खबरें सामने आईं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी भूमिका सीमित किए जाने से वे असंतुष्ट थे। यही कारण माना गया कि उन्होंने चुनाव लड़ने में भी रुचि नहीं दिखाई। नीतिगत मुद्दों पर भी अन्नामलाई ने कई बार स्वतंत्र राय रखी। उन्होंने स्कूलों में तीन भाषा नीति लागू करने के समय और तरीके पर सवाल उठाए थे तथा केंद्र सरकार से इस संबंध में अधिसूचना वापस लेने का आग्रह किया था। इससे यह संकेत मिला कि वे तमिलनाडु के क्षेत्रीय और सांस्कृतिक मुद्दों पर अपनी अलग राजनीतिक सोच रखते हैं। इसके अलावा गठबंधन प्रबंधन, उम्मीदवार चयन और सीट बंटवारे जैसे चुनावी मामलों को लेकर भी अन्नामलाई और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से इन मतभेदों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में अन्नामलाई की भूमिका और भविष्य को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/05जून2026