अंतर्राष्ट्रीय
05-Jun-2026
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-रुसी राष्ट्रपति ने दिया संकेत- शांति वार्ता शुरू करने के लिए युद्धविराम जरूरी शर्त नहीं कीव,(ईएमएस)। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अचानक कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को खुला पत्र लिखकर आमने-सामने मुलाकात की पेशकश की है। जवाब में क्रेमलिन ने कहा कि अगर जेलेंस्की बातचीत करना चाहते हैं तो मॉस्को आ सकते हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा है कि रूस ने जेलेंस्की का पत्र देख लिया है और इसकी जानकारी पुतिन को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पुतिन पहले भी कह चुके हैं कि अगर जेलेंस्की बात करना चाहते हैं तो वे मॉस्को आ सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जेलेंस्की ने अपने पत्र में लिखा कि यूक्रेन इस युद्ध को सीधे संवाद के जरिए खत्म करना चाहता है। उन्होंने पुतिन से आमने-सामने बैठकर बैठक का प्रस्ताव रखा है और कहा कि बातचीत में यूक्रेन पूर्ण युद्धविराम के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि स्विट्जरलैंड, तुर्किये और कुछ अरब देशों ने ऐसी वार्ता की मेजबानी करने की इच्छा जताई है। जेलेंस्की का यह पत्र ऐसे समय आया है जब यूक्रेन लगातार रूस के अंदर तक ड्रोन हमले कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पुतिन ने दावा किया कि रूसी सेना पूरे मोर्चे पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि रूस डोनेट्स्क क्षेत्र के 85 फीसदी से ज्यादा हिस्से और जापोरिज्जिया क्षेत्र के करीब 80 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण रखता है। पुतिन ने कहा कि हम शांति समझौते के लिए तैयार हैं। हम ट्रंप के साथ अलास्का बैठक में जिन समझौतों पर चर्चा हुई थी, उन्हें स्वीकार करने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन यूक्रेन को भी कुछ समझौते करने होंगे। पुतिन ने यह भी संकेत दिया कि शांति वार्ता शुरू करने के लिए युद्धविराम जरूरी शर्त नहीं है। उनका मानना है कि इतिहास में कई बार लड़ाई जारी रहते हुए भी बातचीत हुई है और समझौते हुए हैं। बातचीत में पुतिन से पूछा गया कि क्या वह 2036 तक सत्ता में बने रहना चाहते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि यह तय करने वाला सिर्फ ईश्वर है कि हम कल तक जिंदा रहेंगे या नहीं। अभी मैं 2030 या 2036 के बारे में नहीं सोच रहा। फिलहाल रूस के सामने बड़े मुद्दे हैं और उन्हीं पर ध्यान देना जरूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक पुतिन ने पश्चिमी देशों के उन दावों को भी खारिज किया कि रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था करीब 3 फीसदी बढ़ी, जबकि रूस की अर्थव्यवस्था 10 फीसदी बढ़ी है। हालांकि उन्होंने माना कि महंगाई एक चुनौती है और इसे नियंत्रित करने के लिए रूस ने ब्याज दरें बढ़ाने जैसे कड़े कदम उठाए हैं। सिराज/ईएमएस 05जून26