पटना, (ईएमएस)। मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर के सभी सरकारी अस्पतालों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का फैसला किया है। साथ ही निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से भी अपने यहां अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच कराने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग का यह कदम अस्पतालों में बढ़ती आग की घटनाओं और सुरक्षा खामियों को देखते हुए उठाया गया है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने कहा कि विभाग फायर सेफ्टी ऑडिट की प्रक्रिया दोबारा शुरू करेगा और इसके लिए राज्य अग्निशमन अधिकारी को औपचारिक पत्र भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन अस्पतालों में मरीजों की संख्या अधिक है और जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं, वहां सबसे पहले निरीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों को भी सतर्क रहने और निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करने की सलाह दी जाएगी। मालूम हो कि राज्य के कई सरकारी अस्पताल अभी भी आग लगने जैसी घटनाओं के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं। इसके पीछे कई सामान्य लेकिन गंभीर कारण हैं। सबसे बड़ी समस्या अस्पतालों के प्रवेश द्वारों और गलियारों में अव्यवस्था की है। कई जगह स्ट्रेचर, मरीजों और अन्य सामानों के कारण रास्ते संकरे हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में किसी आपातकाल के दौरान मरीजों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा कई अस्पतालों के वार्डों और विभागों में ढीले तथा खुले बिजली के तार लटकते हुए देखे जाते हैं। इससे शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा लगातार बना रहता है। * पीएमसीएच में एक सप्ताह के भीतर दो बार लगी आग फायर सेफ्टी ऑडिट का निर्णय हाल ही में पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) में हुई आग की घटनाओं के बाद और भी महत्वपूर्ण हो गया है। पिछले एक सप्ताह के भीतर पीएमसीएच परिसर में आग लगने की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आईं। पहली घटना सोमवार को माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण नमूने नष्ट हो गए। इसके दो दिन बाद बुधवार को राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक के ऑपरेशन थिएटर में आग लग गई। इसके अलावा पिछले महीने भी माइक्रोबायोलॉजी विभाग में आग लगने की घटना हुई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने अस्पतालों की विद्युत व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। * किन बिंदुओं की होगी जांच? फायर सेफ्टी ऑडिट के दौरान अस्पतालों में निम्नलिखित पहलुओं की विशेष रूप से जांच की जाएगी- - फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र और अनुमतियों की स्थिति - अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और कार्यक्षमता - विद्युत तारों और उपकरणों की सुरक्षा - आपातकालीन निकासी मार्ग (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था - अस्पताल के गलियारों और प्रवेश द्वारों से अवरोध हटाने की स्थिति - आग लगने की स्थिति में बचाव और निकासी की तैयारियां - मरीजों की सुरक्षा होगी सर्वोच्च प्राथमिकता - स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में मौजूद - सुरक्षा खामियों की पहचान करना, आग से बचाव की व्यवस्था को मजबूत बनाना और - आपात स्थिति में मरीजों व कर्मचारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना है। अधिकारियों का मानना है कि नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट और सुरक्षा मानकों के पालन से अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है और मरीजों की जान की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। संतोष झा- ०५ जून/२०२६/ईएमएस