ज़रा हटके
06-Jun-2026
...


रोम (ईएमएस)। इटली के एड्रियाटिक तट पर बसे एक शांत शहर पुंटा मरीना मोरों की बेकाबू आबादी की समस्या से जूझ रहा है। इस तटीय शहर में 2023 के बाद से मोरों की संख्या में 4 से 5 गुना की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। लगभग 100 से 150 तक मोर अब खुलेआम सड़कों, बगीचों और घरों के आसपास घूमते हुए देखे जा सकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। यह कहानी कुछ साल पहले एक अकेले मोर के कैद से भागकर पुंटा मरीना के पास देवदार के घने जंगलों में शरण लेने से शुरू हुई थी। बाद में, एक मादा साथी के आने से इस पक्षी युगल का कुनबा धीरे-धीरे बढ़ने लगा। समय के साथ, इनकी आबादी ने आसपास के जंगलों की सीमाएं लांघकर पूरे शहर में अपना विस्तार कर लिया। मोरों की आबादी में सबसे बड़ा उछाल कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान आया। शहरी इलाकों में भोजन की आसान उपलब्धता और लोगों द्वारा इन्हें खाना खिलाने की आदत ने इनकी संख्या को तेजी से बढ़ाया। किसी प्राकृतिक शिकारी के न होने के कारण, इन पक्षियों की संख्या बेरोकटोक बढ़ती चली गई। जहाँ 2023 में इनकी संख्या करीब 30 मानी जा रही थी, वहीं अब यह कई गुना बढ़कर 100 से 150 के बीच पहुँच चुकी है। आज, 3000 की आबादी वाला यह छोटा सा शहर मोरों की इस भारी और बढ़ती गिनती के कारण कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों से जूझ रहा है। ये रंग-बिरंगे पक्षी अब शहर की सड़कों, सार्वजनिक बगीचों और निजी छतों पर खुलेआम मंडराते रहते हैं। इनकी वजह से न केवल फुटपाथों पर गंदगी और फिसलन बढ़ गई है, बल्कि सड़कों पर अचानक इनके झुंड के आ जाने से ट्रैफिक जाम भी लगने लगा है, जिससे दैनिक आवागमन प्रभावित हो रहा है। इतना ही नहीं, मोरों का यह झुंड अब कारों और अन्य वाहनों को भी नुकसान पहुँचाने लगा है। अपनी ही परछाई को देखकर भड़कने वाले ये पक्षी कारों की खिड़कियों और बॉडी पर चोंच मारकर उन्हें बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर रहे हैं। वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही इनका मेटिंग सीजन शुरू हो जाता है, जिससे इनका व्यवहार और अधिक आक्रामक हो जाता है। इनकी तेज और कर्कश आवाजों से स्थानीय निवासियों की सुबह की नींद हराम होने लगी है, और शांतिपूर्ण माहौल अशांत हो गया है। इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन और निवासियों के बीच भी मतभेद उभर रहे हैं। पुंटा मरीना के कुछ निवासी इस स्थिति को बेकाबू बताते हुए इन पक्षियों को यहाँ से हटाने या उनकी संख्या को नियंत्रित करने की तत्काल मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह अब केवल एक जीव-जंतु का मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर नागरिक समस्या बन चुका है। वहीं, कुछ लोग इन्हें शहर के लिए एक अनोखा आकर्षण मानते हैं, जो पर्यटन को बढ़ावा दे सकता है। हालांकि, पशु कल्याण समूहों ने मोरों के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है, जिससे प्रशासन के लिए स्थिति और जटिल हो गई है। सुदामा/ईएमएस 06 जून 2026