पुतिन ने जेलेंस्की से मुलाकात करने से किया इनकार मॉस्को,(ईएमएस)। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने की हालिया कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लिखे गए एक खुले पत्र पर क्रेमलिन की बेहद तीखी प्रतिक्रिया आई है। राष्ट्रपति पुतिन ने न केवल जेलेंस्की से किसी भी प्रकार की मुलाकात से साफ इनकार कर दिया, बल्कि उनके पत्र की भाषा को अत्यंत ‘अशिष्ट’ और ‘रूखी’ करार दिया है। दरअसल, जेलेंस्की ने एक खुला पत्र लिखकर स्विट्जरलैंड, तुर्की या किसी अरब देश में आमने-सामने बैठकर सीधे बातचीत और युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसी पत्र में उन्होंने पुतिन के लंबे शासनकाल और उनकी उम्र पर कुछ ऐसी व्यक्तिगत टिप्पणियां कर दीं जिससे रूसी राष्ट्रपति बुरी तरह नाराज हो गए। जेलेंस्की ने अपने पत्र में लिखा कि 26 साल पहले जब पुतिन सत्ता में आए थे, तब यूक्रेन के लोग उन्हें सकारात्मक नजर से देखते थे, लेकिन आज दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ युद्ध और तबाही तक सिमट गए हैं। उन्होंने पुतिन पर सीधा आरोप लगाया कि यह युद्ध नाटो या जियोपॉलिटिक्स का नहीं, बल्कि पुतिन का व्यक्तिगत फैसला है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रूस को हो रहे नुकसानों को गिनाते हुए दावा किया कि रूसी सेना हर महीने 30 हजार से ज्यादा सैनिक खो रही है और देश में ईंधन संकट, महंगाई व अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण जनता में थकान बढ़ रही है। पत्र का सबसे विवादित हिस्सा वह रहा जहां जेलेंस्की ने पुतिन पर व्यक्तिगत तंज कसते हुए लिखा कि 26 साल सत्ता में रहने के बाद अब उम्र अपना असर दिखाने लगी है और समय के साथ लोगों की उनसे थकान और बढ़ेगी। पत्र के अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रूस युद्ध नहीं रोकता तो यूक्रेन अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रखेगा, क्योंकि जब-जब रूस थकता है, तब-तब वहां बड़े बदलाव आते हैं। इस पत्र पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान कहा कि उन्हें फिलहाल यूक्रेनी राष्ट्रपति से मिलने का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता। पुतिन ने सवाल उठाया कि पत्र की अशिष्ट भाषा क्या आमने-सामने की बातचीत के लिए जमीन तैयार करने का तरीका थी या मुलाकात से बचने का एक बहाना? उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर वार्ता से भागने की कोशिश है। पुतिन ने स्पष्ट किया कि किसी भी शांति वार्ता से पहले दोनों पक्षों के विशेषज्ञों को मिलकर एक स्थायी समाधान पर काम करना चाहिए, क्योंकि बिना किसी ठोस रणनीति के सिर्फ युद्धविराम लागू करने से यूक्रेन को दोबारा अपनी सैन्य तैयारी मजबूत करने का मौका मिल जाएगा, जो रूस को कतई मंजूर नहीं है। वीरेंद्र/ईएमएस/06जून2026