06-Jun-2026
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बंगाल बीजेपी अध्यक्ष बोले- हां, फोन आ रहे हैं, टीएमसी सांसद हमसे कर रहे संपर्क नई दिल्ली,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने और विधायकों की बगावत के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के वजूद पर खतरा मंडरा रहा है। दिल्ली में टीएमसी के संसदीय दल में एक बड़ी टूट की पटकथा लिखी जा चुकी है। खबर है कि अगले हफ्ते की शुरुआत में जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक के लिए दिल्ली पहुंचेंगे तब पार्टी के कम से कम 22 सांसद बागी होकर खुद को असली टीएमसी घोषित कर सकते हैं। खबरों के मुताबिक संसद में होने वाले इस तख्तापलट और बागी गुट का नेतृत्व बारासात से लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। इनमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदन के सांसद हैं। इस सियासी हलचल के बीच पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य इस वक्त दिल्ली में ही डेरा डाले हुए हैं। दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा कि हां, फोन कॉल्स आ रहे हैं। तृणमूल के सांसद लगातार हमसे संपर्क कर रहे हैं। टीएमसी अब बीते कल की बात हो चुकी है। निकट भविष्य में यह इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी। बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव लॉकेट चटर्जी ने भी इस कहा कि 4 मई के चुनावी नतीजों के बाद से ही कई सांसद हमारे साथ लगातार संपर्क में हैं। टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सएप, कॉल्स...क्या कुछ नहीं हो रहा है। वे बस पाला बदलना चाहते हैं। संसद में आधिकारिक तौर पर विभाजन को मान्यता दिलाने और दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी धड़े को दो-तिहाई बहुमत की जरुरत होगी। हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद लोकसभा में टीएमसी के 28 सदस्य हैं, जबकि राज्यसभा में उसके 13 सदस्य हैं। कोलकाता की तर्ज पर दिल्ली में खेल करने के लिए बागियों को कम से कम 19 लोकसभा और 9 राज्यसभा सांसदों के समर्थन की जरुरत होगी। सूत्रों के मुताबिक बागी खेमे में इस वक्त दोनों सदनों को मिलाकर 22 सांसदों का आंकड़ा तैयार हो चुका है। टीएमसी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने भी इस संभावित टूट की पुष्टि करते हुए कहा कि संसदीय दल का बिखराव अब अनिवार्य है। शुक्रवार को कई सांसदों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो 16 में से 15 सांसदों के फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहे थे। इनमें कई मनोरंजन जगत के सितारे, पूर्व खिलाड़ी और पहली बार जीते सांसद शामिल हैं। काकली घोष ने एक्स पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के एक कथन और चार्ल्स मैके की कविताओं को शेयर करते हुए अपनी चार दशकों की राजनीतिक लड़ाई का हवाला दिया और एक तरह से आर-पार की जंग का एलान करते हुए चेतावनी भरे लहजे में लिखा– ततैया के छत्ते में हाथ मत डालो। कोलकाता में बागी गुट के नेता और नवनियुक्त नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने इस पर तंज कसते हुए कहा, आज मुझे कुछ काम था तो मैंने 5 सांसदों को फोन किया, सबके फोन एक साथ बंद आ रहे थे। अब इसका जो मतलब निकालना है निकाल लीजिए। डर संक्रामक होता है, लेकिन साहस भी संक्रामक होता है। सिराज/ईएमएस 06जून26