राष्ट्रीय
06-Jun-2026
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अकाल तख्त साहिब पर भारी भीड़ जुटी, भिंडरावाले के बड़े-बड़े पोस्टर लहराए अमृतसर,(ईएमएस)। भारतीय इतिहास के सबसे संवेदनशील सैन्य अभियानों में से एक ऑपरेशन ब्लू स्टार की आज 42वीं बरसी है। इस मौके पर पंजाब के अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में फिर अलगाववादी स्वर सुनाई दिए। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक पीठ श्री अकाल तख्त साहिब पर भीड़ जमा हुई, जहां जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थन में पोस्टर लहराए गए और खालिस्तान के समर्थन में जमकर नारेबाजी हुई। श्री अकाल तख्त साहिब के पास इकट्ठा हुए चरमपंथी और सिख संगठनों के समर्थकों ने हाथों में तख्तियां और जरनैल सिंह भिंडरावाले के बड़े-बड़े पोस्टर ले रखे थे। इस दौरान खालिस्तान जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारियों और कई संगठनों द्वारा हर साल 6 जून को विशेष अरदास की जाती है, जिसमें जरनैल सिंह भिंडरावाले और ऑपरेशन के दौरान मारे गए अन्य लोगों को याद किया जाता है। बरसी की संवेदनशीलता को देखते हुए हर साल की तरह पंजाब पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा अमृतसर और विशेषकर स्वर्ण मंदिर के आसपास सुरक्षा के कड़ी कर दी गई हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके और शांति कायम रहे। बता दें ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय सेना द्वारा 1 से 8 जून 1984 के बीच चलाया गया एक बड़ा सैन्य अभियान था। तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के निर्देश पर सेना ने अमृतसर के हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) परिसर को जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके हथियारबंद समर्थकों के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए यह अभियान चलाया था। सेना की भारी गोलीबारी और कार्रवाई के दौरान 6 जून 1984 को भिंडरावाले की मौत हो गई थी। इस सैन्य कार्रवाई में अकाल तख्त साहिब की इमारत को नुकसान पहुंचा था। समूचे सिख समुदाय ने इसे हरमंदिर साहिब की बेअदबी माना और इंदिरा गांधी को इस कदम की कीमत अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी थी। आज 42 साल बाद भी इस सैन्य ऑपरेशन की बरसी पर होने वाली यह गहमागहमी इस बात का संकेत है कि पंजाब के इतिहास का यह पन्ना आज भी संवेदनशील और भावनात्मक बना हुआ है। बता दें जरनैल सिंह भिंडरावाले का असली नाम जरनैल सिंह बराड़ था। वह सिखों की प्रमुख रूढ़िवादी धार्मिक संस्था दमदमी टकसाल का प्रमुख और 1980 के दशक में पंजाब का एक विवादास्पद कट्टरपंथी नेता था। 1978 में सिख-निरंकारी हिंसक झड़प के बाद वह प्रमुखता से उभरा। उसने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव का आक्रामक रूप से समर्थन किया। 80 के दशक की शुरुआत में उसके भाषणों ने पंजाब में उग्रवाद को भड़काया और उसके समर्थकों पर कई हिंसक वारदातों और हत्याओं के आरोप लगे। पुलिस कार्रवाई से बचने और अपनी गतिविधियों को चलाने के लिए भिंडरावाले ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में हथियारों के साथ अपना मजबूत ठिकाना बना लिया था उसे और उसके सशस्त्र समर्थकों को वहां से निकालने के लिए ही भारतीय सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया, जिसमें 6 जून 1984 को वह मारा गया। मौत के बाद, वह अलगाववादी खालिस्तान आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा बन गया। सिराज/ईएमएस 06जून26