राज्य
06-Jun-2026


जबलपुर (ईएमएस)। आचार्य हितैष चैतन्य ने कहा कि यह शरीर प्रारब्ध कर्मों का परिणाम है| यह अपंचीकृत पंचमहाभूतों से निर्मित है, जिसके माध्यम से जीवात्मा सुख दुख आदि भोगों का अनुभव करता है| सूक्ष्म शरीर सुख दुख भोगने के साधन है| उन्होंने बताया कि सूक्ष्म शरीर की सप्तदशकलाएं अर्थात 17 कलाएं भोग के साधन है| पंच ज्ञानेदन्द्रियां, पंच कर्मेन्द्रियां, पंच प्राण, एक मन और एक बुद्धि यह 17 कलाएं सूक्ष्म शरीर के भोग के साधन है| वेदांत की अगली कक्षाएं आज 7 जून को शाम 4 से 6 बजे तक होगी| सुनील साहू / मोनिका / 06 जून 2026/ 05.54