:: इंदौर में पीड़ित पत्नी का सनसनीखेज खुलासा; करोड़ों के सोनोग्राफी खेल और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के लगाए आरोप :: इंदौर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले का मुख्य आरोपी डॉ. संजीव शिल्पकार पिछले चार वर्षों से जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर आगर मालवा में सक्रिय है। अदालती बंदिशों के बावजूद वह न सिर्फ वहां रह रहा है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर व्यापम की तर्ज पर एक नए सोनोग्राफी खेल और डॉक्टर की हत्या के प्रयास जैसी संगीन वारदातों को अंजाम दे रहा है। यह सनसनीखेज आरोप इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान पीड़ित डॉ. वैभव भावसार की पत्नी प्रतिज्ञा भावसार ने लगाए। प्रतिज्ञा भावसार ने बताया कि आरोपी संजीव शिल्पकार ने सुसनेर स्थित एक सोनोग्राफी सेंटर पर काम शुरू किया था और धीरे-धीरे उस पर कब्जा करने का प्रयास करने लगा। जब सेंटर संभालने वाले स्थानीय डॉक्टर वैभव भावसार ने इस अवैध कब्जे का कड़ा विरोध किया, तो उन्हें जहर देकर मारने की कोशिश की गई। इस जानलेवा हमले के बाद पिछले डेढ़ साल से डॉ. वैभव जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। जहर के असर के कारण उनका बोलना और चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो चुका है और वे बिस्तर पर हैं। :: सीएमएचओ कार्यालय और डॉक्टरों की मिलीभगत का आरोप :: श्रीमती भावसार ने आरोप लगाया कि संजीव शिल्पकार ने आगर मालवा के स्वास्थ्य विभाग (सीएमएचओ) और कई नामी सरकारी डॉक्टरों को मोटे कमीशन के जाल में फंसा रखा है। इसी रसूख के चलते नियमों को ताक पर रखकर आरोपी को संवेदनशील पीसीपीएनडीटी लाइसेंस जारी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि जब पीड़ित संचालक ने अपना सेंटर बंद करने का अनुरोध किया, तो सीएमएचओ कार्यालय ने महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं की। आगर के कई डॉक्टर इसी सेंटर पर सोनोग्राफी कराने का दबाव बनाते हैं, जिसमें एक हड्डी रोग विशेषज्ञ और एक एलएमओ द्वारा मरीजों को जबरन यहां भेजने के प्रमाण हैं। :: प्रशासनिक बेरुखी से टूटा परिवार, न्याय की गुहार :: शिकायतकर्ता महिला खुद क्रॉनिक पेंक्रियाटाइटिस और आर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। उन्होंने रुआंसे गले से बताया कि पुलिस प्रशासन, आला अधिकारियों और जनसुनवाई में कई बार न्याय की गुहार लगाने के बावजूद रसूख और पैसे के दम पर आज तक आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। उल्टा शिकायत वापस लेने के लिए पीड़ित परिवार, उनके 80 वर्षीय बुजुर्ग पिता और छोटे बच्चों को लगातार डराया-धमकाया जा रहा है। प्रशासनिक बेरुखी और आर्थिक तंगी से पूरी तरह टूट चुका यह पीड़ित परिवार अब शासन-प्रशासन से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगा रहा है। प्रकाश/06 जून 2026