राज्य
06-Jun-2026
...


:: ‘फ्यूचर बाय डिज़ाइन : द थर्ड आई’ कार्यशाला में आर्किटेक्ट्स ने सीखे एआई टूल्स और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के गुर, बांटे गए सीड बॉल्स :: इंदौर (ईएमएस)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (आईआईए), इंदौर सेंटर द्वारा एक विशेष कार्यशाला “फ्यूचर बाय डिज़ाइन: द थर्ड आई – बियॉन्ड बाउंड्रीज़” का सफल आयोजन किया गया। तीन घंटे के इस विशेष कार्यक्रम में शहर के आर्किटेक्ट्स, डिजाइनर्स और कंस्ट्रक्शन प्रोफेशनल्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्किटेक्चर के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की नई संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। आईआईए इंदौर सेंटर के अध्यक्ष आर्किटेक्ट नितिन घुले ने कहा कि यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। :: एआई को ‘थर्ड आई’ के रूप में अपनाएं आर्किटेक्ट्स :: कार्यक्रम की संयोजक एवं आईआईए इंदौर सेंटर की सचिव आर्किटेक्ट स्नेहल सोनटक्के ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य संचालन आर्किटेक्ट सोमाली सिन्हा द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को डिजाइन एवं कंस्ट्रक्शन उद्योग में एआई के बढ़ते प्रभाव, व्यावहारिक उपयोग और इसकी भविष्य की संभावनाओं से परिचित कराया। कार्यशाला में एआई आधारित डिजाइन टूल्स, प्रेजेंटेशन तकनीक, कंटेंट क्रिएशन, विजुअलाइजेशन और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी विषयों को विस्तार से समझाया गया। विषय विशेषज्ञ आर्किटेक्ट सोमाली सिन्हा ने एआई के मूलभूत सिद्धांतों से अवगत कराते हुए बताया कि आधुनिक दौर में एआई को एक “थर्ड आई” (तीसरी आंख) के रूप में देखा जा सकता है, जो पेशेवरों की रचनात्मकता, कार्यक्षमता और निर्णय क्षमता को एक नई दिशा प्रदान करता है। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न एआई टूल्स के लाइव डेमो भी देखे तथा विशेषज्ञों से अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। :: पर्यावरण संरक्षण के लिए सीड बॉल्स का वितरण और फिल्म ‘युगांधर’ का प्रदर्शन :: विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में इस तकनीकी कार्यशाला को प्रकृति से जोड़ते हुए सभी प्रतिभागियों को देशी पौधों के सीड बॉल्स भेंट किए गए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी सहभागिता को जमीनी स्तर पर प्रोत्साहित किया जा सके। आईआईए इंदौर सेंटर के कोषाध्यक्ष आर्किटेक्ट अर्पित काबरा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम आर्किटेक्ट्स में पर्यावरणीय संवेदनशीलता, नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने वाला साबित होगा। इसी कड़ी में कार्यक्रम के दौरान आर्किटेक्ट कपिल जैन द्वारा निर्देशित और निर्मित लघु फिल्म “युगांधर” का भी विशेष प्रदर्शन किया गया। इस फिल्म में विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की महती आवश्यकता को बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। फिल्म ने यह कड़ा संदेश दिया कि हर सृजनकर्ता को अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज और प्रकृति के सामूहिक हित में करना चाहिए। कार्यशाला का समापन उपस्थित प्रतिभागियों, आयोजकों एवं वक्ताओं के बीच एक सार्थक संवाद तथा भविष्य में एआई के जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग के संकल्प के साथ हुआ। प्रकाश/06 जून 2026