जयपुर (ईएमएस)। राज्य सरकार ने राज्य के सरकारी विद्यालयों के भवनों का सुरक्षा की दृष्टि से सर्वे करवाया है। सर्वे के बाद रीसर्वे किया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर नए भवन निर्माण व रिपेयर की 5 साल की कार्य योजना बनाई गई है। इस वित्तीय वर्ष में लगभग 20 अरब रूपये के बजट से नए भवन निर्माण, अतिरिक्त सुविधाओं के विकास व मरम्मत कार्य होंगे। इस अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने गुरूवार को सचिवालय में बैठक ली और इस अभियान को पूरी संवदेनशीलता और गम्भीरता से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण व मरम्मत कार्य में नवीनतम तकनीक, उच्चतम गुणवत्ता और समय सीमा की पालना करने के निर्देश दिए। शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने बताया कि इस वित्त वर्ष में 500 से ज्यादा राजकीय विद्यालयों के नए भवनों का निर्माण होना है। सर्वे में कुछ ऐसे विद्यालय भवन मिले, जहां कोई कमरा विशेष ही खराब हालत में है और शेष बिल्डिंग पूरे मानकों पर खरी उतरी है। इसके अतिरिक्त कुछ विद्यालयों में नामांकन बढ़ने या अतिरिक्त विषय शुरू होने के कारण अतिरिक्त कक्षा कक्ष निर्माण की आवश्यकता है। प्रत्येक कक्षा कक्ष निर्माण के लिए 10 लाख रूपये बजट का आकलन किया गया है। विद्यालयों में पर्याप्त पानी की व्यवस्था के साथ शौचालय सुविधा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सर्वे में सामने आया कि कुछ विद्यालयों के भवन 50 साल से भी अधिक पुराने हैं, ज्यादातर विद्यालय भवन निर्माण के समय प्लिंथ मानक का ध्यान नहीं रखा गया और ड्रेनेज सिस्टम सुचारू न होने से सीपेज, सीलन की समस्या आ गई है। एसीएस श्री राजेश यादव ने बताया कि नए भवन निर्माण में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की गाइडलाइन, बीआईएस के मानक और विशेष योग्यजन अधिनियम, 2016 के बिन्दुओं की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जा रही है। 1 करोड़ रूपये से अधिक के निर्माण कार्य में ऑन साइट क्वालिटी कंट्रोल लैब, 30 लाख रूपये से अधिक के कार्य में सार्वजनिक निर्माण विभाग और नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड द्वारा चिन्हित ऐजेंसी द्वारा स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण करवाया जाना सुनिश्चित किया गया है। बिजली बचत और बच्चों के स्वास्थ्य विशेषकर आई साइट के लिए पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी की व्यवस्था की गई है। स्ट्रक्चर डिजाइन को राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा परीक्षण करने के बाद की स्वीकृति दी जा रही है। भवन की सुरक्षा और उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के लिए आरसीसी फ्रेम डाला जा रहा है। दीवार और छत को वाटरप्रूफ बनाने पर बल है जिससे सीपेज और सीलन न हो। उपयुक्त ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। अशोक शर्मा/ 4 बजे/ 7 जून 2026