मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जिस तरह प्रदेश की महिलाओं के समग्र उत्थान लिए काम कर रहे हैं, उसके चलते राजनीतिक विथिकाओं में अब ऐसा माना जाने लगा है कि डॉ. मोहन यादव और बहनों के बीच स्वस्थ आत्मीय रिश्ते प्रगाढ़ होते जा रहे हैं। भाई-बहन के ये रिश्ते भारतीय जनता पार्टी के लिए न केवल बेहद मुफीद होंगे बल्कि 2028 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की तकदीर लिखने में महत्वपूर्ण रोल अदा करेंगे। डॉ. मोहन यादव अपने समग्र महिला उत्थान और स्वावलंबन के इन तमाम भागीरथी प्रयासों से वे प्रदेश की बहनों के बीच न केवल खासे लोकप्रिय हो गए हैं, बल्कि वे अब देश की बहनों के लाड़ले भैया के रूप में माने जाने लगे हैं। मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश की कमान संभाली और बेहद समझदारी के साथ परिपक्व राजनेता तब्दील हो चुके हैं। डॉ. मोहन यादव इस बात को बखूबी जानते थे कि यदि प्रदेश में सरकार चलानी है और दोबारा सत्ता में लानी है तो प्रदेश की लगभग कुल आबादी का 49 प्रतिशत महिला आबादी को न केवल खुद से जोड़ना होगा बल्कि उन्हें अपना बनाना होगा। इसके लिए इस मातृशक्ति के बीच उन्हें अपने आप को एक ऐसे भाई के रूप में स्थापित करना होगा जैसी कृष्ण ने द्रोपदी के लिए एक सशक्त और समर्थ भाई की भूमिका निभाई थी। डॉ. मोहन यादव ने सत्ता संभालने के बाद मातृशक्ति के लिए लगातार किए जा रहे अपने कामों से यह साबित कर दिया कि मातृशक्ति के बीच वे न केवल विश्वसनीय बन गए बल्कि प्रदेश की बहनें उन्हंं एक मुख्यमंत्री के साथ-साथ एक सहृदय बड़े भाई के रूप में उन्हें स्वीकार करती हैं। डॉ. मोहन यादव सरकार ने महिला कल्याण योजनाओं को केवल सहायता वितरण तक सीमित न रख के उन्हें सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक स्वावलंबन और बालिका सशक्तिकरण के व्यापक अभियान के रूप में विकसित करने का प्रयास किया है। इसके सकारात्मक परिणाम शहरों से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक दिखाई देने लगे हैं। मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 49 प्रतिशत महिलाएं हैं जो 4.1 करोड़ से 4.2 करोड़ के आसपास आंकी जाती है। प्रदेश में कल 5.39 करोड़ वोटर हैं। जिनमें महिला वोटर 2.5 करोड़ से 2.6 करोड़ के बीच अनुमानित हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में लगभग 76 प्रतिशत महिलाओं ने भाजपा को वोट किया था जो 2018 से चुनाव से लगभग दो प्रतिशत अधिक था।अब सहज ही समझा जा सकता है कि प्रदेश में सत्ता प्राप्त करने के लिए इनका महत्व क्या है? 2026 में असम मे हेमंत विश्व सरमा और पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार की बंपर सफलता का उदाहरण सारे देश के सामने हैं। इस बंपर जीत में मातृशक्ति का भाजपा को जीतने में जो योगदान है वह किसी से छिपा नहीं है। मध्यप्रदेश में लगभग 29 विधानसभा ऐसी हैं, जहां महिला वोटर की संख्या पुरुष वोटरों से अधिक है और आधा सैकड़ा से अधिक सीटों पर वे निर्णायक भूमिका भी रखती है। एक बेहद परिपक्व और दूरदर्शी मुख्यमंत्री बन चुके मोहन यादव इस राजनीतिक मर्म को समझते थे और शुरुआती दौर से ही समग्र महिला विकास पर उन्होंने अपनी सरकार को फोकस किया। इस बार डॉ. मोहन यादव ने अपना जन्मदिन मातृशक्ति के बीच मना कर एक ऐसी अमिट छाप छोड़ी जिसकी अनुगूंज सारे प्रदेश में सुनाई दे रही है। लाड़ली बहना के अतिरिक्त डॉ. मोहन यादव सरकार के द्वारा प्रारंभ की गई महिला हितैषी योजनाएं प्रदेश में... महिला प्रथम... महिलाओं का वास्तविक आधार बन चुका है और हम इसे केवल एक वित्तीय सहायता मानकर ही इसके स्वरूप का आंकलन नहीं कर सकते बल्कि यह सरकार और डॉ. मोहन यादव के बीच इन बहनों के उस भरोसे की एक ऐसी नजीर बन गई है, जिसके चलते ये बहनें आज मोहन यादव को लाड़ले भैया कहकर संबोधित कर रहीं है। अकेली लाड़ली बहना ही इस मातृशक्ति के लिए काफी नहीं है बल्कि लखपति दीदी योजना, मुख्यमंत्री उद्यम शक्ति योजना, नारी शक्ति मिशन जैसी तमाम कार्यक्रमों को एक कड़ी में पिरोकर डॉ. मोहन यादव ने महिला सशक्तिकरण का एक विशाल पैकेज मध्य प्रदेश में खड़ा कर डाला है। लाड़ली लक्ष्मी ने जहां बेटियों के शिक्षा का भविष्य सुरक्षित किया है ,वहीं लखपति दीदी, उद्यम शक्ति ,ड्रोन दीदी समेत स्वावलंबन की कई योजनाओं के माध्यम से शहर से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक की महिलाओं ने अपने छोटे-मोटे व्यवसाय शुरू करके अपनी आत्मनिर्भरता और सम्मान दोनों को स्थापित तो किया ही साथ ही परिवार और समाज में अपनी अहम जगह बनाई है। प्रदेश में 4 लाख से अधिक महिलाएँ स्व-रोजगार योजना से जुड़ी हैं, वहीं रेडीमेड उद्योग एवं कारखानों में कार्यरत महिलाओं को पांच हजार रूपए की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही 34 लाख महिला कृषकों को दुग्ध उत्पादन से जोडक़र उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से मोहन सरकार के कार्यकाल में 53 लाख बेटियों के जीवन में न केवल सकरात्मक बदलाव आया है। बल्कि प्रदेश की 80 लाख बेटियों को शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति भी दी जा रही है और सेनेटरी पेड के लिए राशि भी प्रदान की जा रही है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है और एनआरएलएम योजनाओं से 17 हजार करोड़ से अधिक की राशि का प्रावधान मोहन सरकार ने केवल इसलिए किया है, जिससे ग्रामीण गरीब महिलाओं को स्व-सहायता समूह से जोडक़र उनकी आय में वृद्धि की जा सके। डॉ. मोहन यादव की महिला हित में प्रतिबद्धता केवल इस बात से समझी जा सकती है कि राज्य के कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा यानी लगभग 1.27 लाख करोड़ केवल महिला केन्द्रित योजनाओं के लिए मोहन सरकार ने आवंटित किया है। बताया जाता है कि अकेले महिला कल्याण और संरक्षण पर ही 45 हजार करोड़ से ज्यादा की व्यवस्था की गई है। अकेले राज्य सरकार की योजनाओं पर ही मोहन यादव ने काम नहीं किया बल्कि बहनों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी की योजनाओं के क्रियान्वयन में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में प्रदेश ने लगातार शीर्ष स्थान पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जिसमें गर्भवती और शिशु स्वास्थ्य दर में प्रदेश ने खासी सफलता अर्जित की है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु कार्यक्रम, मिशन इंद्रधनुष तथा एनएचएम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित संस्थागत प्रसव, पोषण सहायता और नवजात शिशुओं की बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराकर मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में पिछले दो वर्ष में तुलनात्मक रूप से निरंतर सुधार दर्ज किया गया है। ऐसी एक नहीं तमाम योजनाएं हैं जिन सभी का उल्लेख करना संभव नहीं है। सच तो यह है कि आज महिला न केवल नगद राशि पाने वाली लाभार्थी बनी है बल्कि राज्य की आर्थिक रीढ़ के साथ-साथ नीति निर्माण में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही है। महिला स्व-सहायता समूह, गैस, राशन, आवास जैसी तमाम योजनाओं में मोहन सरकार ने महिलाओं को सीधे जोडक़र इन्हें सम्मान दिया है। महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण 33 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत करने वाला राज्य तो म.प्र. बना ही है। पंचायत और स्थानीय निकायों में भी महिलाओं की भूमिका को डॉ. मोहन यादव ने बेहद मजबूत भी किया है। डॉ. मोहन यादव ने महिलाओं को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए इन बहनों के बीच अपने आप को एक ऐसे भाई के रूप में स्थापित किया जिसे अपनी बहनों के रोजगार, स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा की न केवल चिंता है, बल्कि इन मुद्दों पर वह और उनकी सरकार संवेदनशीलता के साथ-साथ गंभीर और सख्त भी है। इसके साथ राज्य में अब तक 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूह के माध्यम से 60 लाख बहनें जुड़ी है और यह न केवल बचत और ऋण का माध्यम है बल्कि गांव में होने वाले निर्णय में एक सशक्त भागीदारी वाली आवाज भी बनी है। नारी शक्ति मिशन के तहत जेंडर जागरूकता, घरेलू हिंसा विरोध, बाल विवाह रोकथाम और डिजिटल साक्षरता ने भी महिलाओं के उत्थान में बेहद योगदान दिया है। विगत 2 वर्ष के कार्यकाल में सरकार ने महिला हेल्पलाइन 181, महिला डेस्क, वन स्टॉप सेंटर, सायबर क्राइम, महिला परामर्श केन्द्र तथा ऑनलाइन शिकायत प्रणाली को महिला सुरक्षा हेतु और अधिक सशक्त और प्रभारी बनाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की महिला केंद्रित योजनाओं ने जहां उनकी छवि एक ऐसे भाई के रूप में बनाई है जो न केवल लगभग हर क्षेत्र में बहनों का पूरा-पूरा ख्याल रखता है। साथ ही उनके समग्र विकास के लिए निरंतर प्रत्याशी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इन प्रयासों से जहां न केवल भाजपा का महिला वोट बैंक बेहद मजबूत होगा वहीं भाजपा इस भरोसे को एक स्थायी समर्थन में बदलने की कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। गैस, राशन ,आवास और नगद सहायता जैसी योजनाओं से गांव में महिलाओं के बीच भाजपा की पकड़ और जकड़ बेहद मजबूत हो रही है। महिला लाभार्थी वर्ग भाजपा के लिए सशक्त रक्षात्मक ढाल बन सकता है और 2026 असम और बंगाल चुनाव के चुनाव में यह साबित भी हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश की मातृ शक्ति के बीच आपसी बॉन्डिंग न केवल मजबूत हुई है बल्कि उसने अब एक गठबंधन का रूप ले लिया है। प्रदेश की मातृ शक्ति डॉ. मोहन यादव पर न केवल विश्वास करती है बल्कि बेहद गहराई के साथ उनसे जुड़ी भी है और निश्चित रूप से यह जुड़ाव वर्ष 2028 के आम चुनाव में भाजपा के पक्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सहायक होगा इसमें कोई संदेह नहीं है और इसका श्रेय निश्चित रूप से डॉ. मोहन यादव के खाते में ही जाएगा। महिला सुरक्षा और उनके समग्र विकास के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में एक भाई के रूप में विशाल व्यक्तित्व बनकर इन बहनों के बीच एक ऐसी ढाल बनकर खड़े हो गये हैं जिनके संरक्षण में मध्य प्रदेश की महिलाएं न केवल अपने आपको बेहद सुरक्षित महसूस करती हैं बल्कि अपने सामाजिक, आर्थिक सहित चहुंमुखी विकास की ओर अग्रसर होगीं। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और स्तंभकार हैं) ईएमएस/07/06/2026