रायसेन (ईएमएस)। जिले में पेट्रोल-डीजल रसोई गैस सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रफ्तार पर महंगाई का ब्रेक लगा दिया है। लगातार बढ़ रहे ईंधन के दामों ने गरीब, मध्यम वर्ग, किसानों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और वाहन चालकों की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। रायसेन शहर सहित जिलेभर में पेट्रोल 115.70 रुपए प्रति लीटर और डीजल 100.86 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। सबसे ज्यादा असर रोजाना वाहन चलाने वाले लोगों पर दिखाई दे रहा है। सुबह-शाम नौकरी, व्यापार या पढ़ाई के लिए सफर करने वाले लोग अब हर दिन बढ़ते खर्च का हिसाब लगाने को मजबूर हैं। शहर के वाहन चालक राहुल राठौर, अमित दुबे, प्रकाश मुनियन, यासिर खान और मोहम्मद यामीन खान का कहना है कि पहले जहां बाइक की टंकी भरवाने में करीब 800 रुपए खर्च होते थे, वहीं अब 900 रुपए से अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि महीने का पेट्रोल खर्च तेजी से बढ़ गया है, जिससे घरेलू बजट गड़बड़ाने लगा है। चार पहिया वाहन चालकों की परेशानी भी कम नहीं है। निजी कार से रोजाना सफर करने वाले लोगों का कहना है कि अब जरूरी कामों के अलावा वाहन निकालने से भी लोग बचने लगे हैं। कई परिवारों ने सप्ताहांत की यात्राएं और घूमना-फिरना भी सीमित कर दिया है। महंगाई की मार ऑटो और टैक्सी चालकों पर भी साफ दिखाई दे रही है। ऑटो चालक लक्ष्मी प्रसाद यादव, मनोज मालवीय और भगवान दास लोधी,गणेश राम ने बताया कि डीजल-पेट्रोल महंगा होने के बावजूद किराया बढ़ाना आसान नहीं है। किराया बढ़ाते हैं तो यात्रियों की नाराजगी झेलनी पड़ती है और किराया नहीं बढ़ाएं तो बचत खत्म हो जाती है। उनका कहना है कि पहले दिनभर में जो आमदनी बच जाती थी।अब उसका बड़ा हिस्सा ईंधन में ही निकल जाता है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। व्यापारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से आने वाले दिनों में रोजमर्रा की वस्तुएं और महंगी हो सकती हैं। व्यापारी अशोक राठौर और मनीष बंटी माहेश्वरी ने बताया कि बाहर से आने वाले सामान की ढुलाई लागत बढ़ गई है। इसका असर सब्जियों, राशन सामग्री, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ना तय है। शहर के किराना व्यापारियों का कहना है कि माल भाड़ा बढ़ने के कारण कंपनियां भी रेट बढ़ाने की तैयारी में हैं। ऐसे में आने वाले समय में आम आदमी को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है। पहले ईंधन महंगा और फिर उससे जुड़ी रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी। इधर, किसानों के लिए भी बढ़ती डीजल कीमतें नई चिंता लेकर आई हैं। खेती-किसानी पहले से ही महंगी हो चुकी है। अब ट्रैक्टर, पंप और कृषि उपकरणों के संचालन का खर्च भी बढ़ गया है। किसान हरनाम सिंह जाट, रमेश लोधी, रामस्वरूप राठौर और विजय चौकसे ने बताया कि खेतों में सिंचाई, जुताई और फसल परिवहन का पूरा खर्च डीजल पर निर्भर रहता है। ऐसे में डीजल महंगा होने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में कृषि उत्पादन पर भी असर दिखाई देगा। कॉलेज छात्रों और नौकरीपेशा लोगों ने भी महंगाई पर चिंता जताई है। छात्रों का कहना है कि रोज कॉलेज आने-जाने का खर्च बढ़ गया है। वहीं निजी कंपनियों और कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि वेतन वही है ।लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कई लोगों ने सरकार से पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स में राहत देने की मांग की है। महंगाई के बीच जिला प्रशासन और सामाजिक संगठन लोगों को ईंधन बचत के लिए जागरूक करने में जुटे हैं। जिला प्रशासन द्वारा लोगों से अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने, छोटी दूरी के लिए पैदल चलने, साइकिल का उपयोग करने और कार पूलिंग अपनाने की अपील की जा रही है। कुछ संस्थाओं ने स्कूल-कॉलेजों और कार्यालयों में भी जागरूकता अभियान शुरू किए हैं। हालांकि आम लोगों का कहना है कि केवल जागरूकता से राहत नहीं मिलेगी। जब तक ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण नहीं होगा।तब तक हर वर्ग की आर्थिक मुश्किलें बढ़ती रहेंगी। लोगों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में लगी महंगाई की आग अब सीधे हर घर की रसोई और मासिक बजट तक पहुंच चुकी है। ईएमएस/मोहने/ 07 जून 2026