(9 जून : अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस पर विशेष) ऐतिहासिक दस्तावेजों और अभिलेखों के संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 9 जून को अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का आयोजन अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार परिषद (आईसीए) द्वारा किया जाता है, जो विश्वभर में अभिलेखों के संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में प्रमुख संस्था है।इस दिवस का इतिहास भी अत्यंत रोचक है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के तत्वावधान में 9 जून 1948 को अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार परिषद (आईसीए) की स्थापना हुई थी। बाद में वर्ष 2007 में आईसीए की आम सभा में यह निर्णय लिया गया कि परिषद के स्थापना दिवस को ही प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप पहला आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस 9 जून 2008 को आयोजित किया गया। इस दिवस का मूल उद्देश्य इतिहास, संस्कृति और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखने वाले अभिलेखागारों के महत्व को रेखांकित करना है। वास्तव में, अभिलेखागार केवल पुराने कागजों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि वे किसी समाज, राष्ट्र और सभ्यता की सामूहिक स्मृति होते हैं। वे हमारी पहचान, अधिकारों और विरासत के संरक्षक हैं तथा अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं। बहरहाल, यहां पाठकों को बताता चलूं कि दुनिया का सबसे प्राचीन अभिलेख मिट्टी की पट्टियों पर अंकित व्यापारिक लेन-देन का विवरण माना जाता है। समय के साथ अभिलेखों का स्वरूप बदलता गया और आज इनमें सरकारी दस्तावेज, नक्शे, तस्वीरें, फिल्में, ऑडियो रिकॉर्डिंग, ई-मेल तथा डिजिटल फाइलें भी शामिल हैं। अनेक अभिलेखागारों में ऐसे संवेदनशील और गोपनीय दस्तावेज भी सुरक्षित रखे जाते हैं जिन्हें ‘डार्क आर्काइव्स’ कहा जाता है। इन अभिलेखों को संरक्षित तो रखा जाता है, लेकिन उनकी सामग्री को आम जनता अथवा शोधकर्ताओं के लिए कई दशकों तक उपलब्ध नहीं कराया जाता।अभिलेखों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि किसी देश के कानूनों, युद्धों, स्वतंत्रता आंदोलनों, सरकारी निर्णयों और सामाजिक परिवर्तनों से जुड़े मूल दस्तावेज इन्हीं में सुरक्षित रहते हैं। सरकारी अभिलेख प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। नई दिल्ली स्थित भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार में मुगल काल, ब्रिटिश शासन और स्वतंत्र भारत से जुड़े लाखों मूल्यवान दस्तावेज संरक्षित हैं, जो शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि अभिलेख केवल इतिहास को संरक्षित नहीं करते, बल्कि संकट के समय लोगों के अधिकारों की रक्षा भी करते हैं। युद्ध, बाढ़, भूकंप या आग जैसी आपदाओं के बाद नागरिकों की पहचान, संपत्ति और कानूनी अधिकारों को प्रमाणित करने में अभिलेख महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण इन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखी जाने वाली अमूल्य विरासत माना जाता है।वर्तमान समय डिजिटल क्रांति का युग है। सूचनाओं के तीव्र प्रवाह और तकनीकी परिवर्तनों के बीच प्रमाणिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखना पहले की अपेक्षा अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि अपने अतीत को सुरक्षित रखे बिना हम एक सशक्त और जागरूक भविष्य की कल्पना नहीं कर सकते। (सुनील कुमार महला, फ्रीलांस राइटर, कॉलमिस्ट व युवा साहित्यकार, पिथौरागढ़, उत्तराखंड।) ईएमएस / 08 जून 26