-11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही टनल 2028 में खुलने की संभावना नई दिल्ली,(ईएमएस)। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच बन रही जोजिला टनल टनल के दोनों छोर मंगलवार को आपस में जुड़ गए। इससे पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रिमोट दबाकर ब्लास्ट किया। उनके साथ जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला भी मौजूद थे। यह टनल 13.15 किमी लंबी है, जो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को जोड़ेगी। इससे सेना के लिए रसद और हथियारों की सप्लाई आसान हो जाएगी। यहां बताते चलें कि करीब 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही यह टनल की लागत करीब 6,500 करोड़ रुपए है। जोजिला टनल में सीसीटीवी कैमरे, रेडियो कंट्रोल और हवा के बहाव के लिए एडवांस वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, ब्रेकथ्रू के बाद सिविल और इलेक्ट्रिकल काम पूरा करके इस सुरंग को जनवरी-फरवरी 2028 तक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक टनल का करीब 50फीसदी काम पूरा हो चुका है, जबकि कुछ अधिकारियों का कहना है कि 80फीसदी काम हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक टनल को फरवरी 2028 तक आम लोगों के लिए खुल सकती है। समुद्र तल से करीब 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही ये सुरंग दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब बाईडायरेक्शनल सुरंग है। ये सुरंग श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे पर स्थित है। श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की वजह से सर्दियों के तीन महीनों के लिए पूरी तरह बंद हो जाता है, जिससे लद्दाख का संपर्क देश से कट जाता है। लेकिन इस ऑल-वेदर सुरंग के पूरी तरह शुरू होने के बाद कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच साल भर आना-जाना हो सकेगा। पहले जोजिला दर्रे को पार करने में 1 से 1.5 घंटे का समय लगता था, वह सफर अब महज 15 मिनट में तय होगा। जोजिला सुरंग संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सशस्त्र बलों के लिए रसद, सैन्य टुकड़ियों और हथियारों की सप्लाई को बेहद सुरक्षित होगी। इसके साथ ही आम नागरिकों के लिए भी ये वरदान से कम नहीं है। इससे सर्दियों में होने वाला अलगाव खत्म होगा और क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और जरूरी सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। लोगों का कहना है कि इस सुरंग के बनने से उनका सालों पुराना सपना सच होने जा रहा है। लद्दाख के रहने वाले एक शख्स ने कहा कि हम इस टनल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं। हम न सिर्फ यात्रा कर पाएंगे, बल्कि टनल के जरिए चीजों का लेन-देन भी कर पाएंगे। इससे हमारे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। बता दें पश्चिमी हिमालय के इस हिस्से में सुरंग बनाना बेहद मुश्किल काम था। इसे बनाने में इंजीनियरों को -20डिग्री से -30डिग्री तक के तापमान, हिमस्खलन के खतरे और हिमालय की नाजुक और बदलती चट्टानी संरचना जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एजेंसी ने बिना किसी दुर्घटना के इस काम को पूरा किया। इस परियोजना में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो नाजुक पहाड़ों में स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में कारगर है। ये मुख्य सुरंग पश्चिमी पोर्टल में कश्मीर के बालटाल से शुरू होकर लद्दाख के मीनामार्ग पर खत्म होती है, जिसकी चौड़ाई 9.5 मीटर और ऊंचाई 7.57 मीटर है। सिराज/ईएमएस 10 जून 2026