कोरबा (ईएमएस)। कोरबा जिले में कोयले का अकूत भंडार है। जिसके उत्खनन के लिए कामर्शियल माइनिंग के तहत कोल ब्लॉकों की नीलामी की गई है। कंपनियों को कोल ब्लॉक शुरू करने से पहले कई चुनौतियों से गुुजरना होगा। दरअसल कंपनियों को कोल ब्लॉक सौंपने प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू की गई है। जिसके तहत गांवों में एफएआर के तहत प्रमाण पत्र के लिए ग्राम सभा आयोजित करने आदेश जारी किए गए हैं। यह आदेश पहुंचते ही प्रभावित गांव के ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। प्रशासन से ग्राम सभा के लिए जारी आदेश निरस्त करने मांग की जा रही है। कलेक्टर जनदर्शन में कोरबा विकासखंड के ग्राम पंचायत कोरकोमा व केरवां के ग्रामीण भारी संख्या में पहुंचे थे। कोरकोमा सरपंच व केरवां सरपंच की अगुवाई में पहुंचे ग्रामीणों ने कलेक्टर के अलावा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपा है। उन्होने ज्ञापन के माध्यम से आगामी दिनोंं ग्राम सभा आयोजित करने संबंधी आदेश को निरस्त करने की मांग की है। दरअसल जिले मे कोयले का अकूत भंडार है। जिसका उत्खनन एसईसीएल सहित विभिन्न अनुषांगिक कंपनियां कर रही है। इसके अलावा निजी कंपनियों को भी कोल ब्लॉक आबंटित किए गए हैं। उल्लेखनीय हैं की बीते दिनों भी कोल मंत्रालय द्वारा कामर्शियल माइनिंग के तहत कोल ब्लॉक नीलामी की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें मेसर्स मिवान स्टील लिमिटेड दिल्ली भी शामिल था। मेसर्स मिवान स्टील को रजगामार डीप साइड कोल ब्लॉक मिला है। यह कोल ब्लॉक फुलकडीह नाले के दक्षिण में स्थित है। इस कोल ब्लॉक से भैसमा तहसील के अंतर्गत आने वाले रजगामार, केराकछार, कोरकोमा, केरवां व केरवां के आश्रित ग्राम ढेगुरडीह शामिल हैं। कंपनी द्वारा कोल ब्लॉक शुरू करने से पहले जरूरी प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसके लिए कंपनी ने आवेदन भी प्रस्तुत कर दिए हैं। जिसके तहत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा संबंधित ग्राम पंचायतों में एफएआर के तहत प्रमाण पत्र प्रदान करने ग्राम सभा आयोजित करने दिशा निर्देश तहसीलदार को दिया गया है। कार्यालय से पत्र जारी होते ही ग्रामीणों में कोल ब्लॉक खोले जाने का विरोध शुरू हो गया है। सरंपचों के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने कलेक्टर व अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने ग्राम सभा आयोजित करने जारी आदेश को निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा है कि प्रशासन द्वारा जबरदस्ती करने पर वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। कलेक्ट्रेट पहुंचे कोरकोमा व केरवां के ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी जमीन से 400 मीटर नीचे कोयले का उत्खनन करेगी, लेकिन जमीन के नीचे खुदाई का असर गांवों पर पड़ेगा। कोयला उत्खनन से न सिर्फ जलस्तर नीचे चला जाएगा, बल्कि जंगल और उनकी जमीन प्रभावित होगी। गांव में देवस्थल, पारंपरिक पूजा स्थल प्रभावित होगा। इसके अलावा वन्यजीवों का जीवन भी संकट में पड़ जाएगा। वे जल, जंगल और जमीन की विनाश के शर्त पर कोयला उत्खनन के लिए राजी नही हैं। बताया जा रहा है कि मेसर्स मिवान स्टील लिमिटेड को रजगामार डीप साइड फुलकडीह नाला कोल ब्लॉक आबंटित है। जिसमें रजगामार के अलावा कोरकोमा, केराकछार, केरवां व केरवां के आश्रित ग्राम ढेंगूरडीह शामिल हैं। इस क्षेत्र के 636. 82 हेक्टेयर जमीन में कोल ब्लाक का विस्तार होगा। इस क्षेत्र में जी 8 ग्रेड का उच्च गुणवत्तायुक्त कोयला मौजूद है। क्षेत्र में करीब 72.46 मिलियन टन कोयला होने का अनुमान है। खासबात तो यह है कि इस कोल ब्लॉक के एक हिस्से में पहले से ही एसईसीएल के रजगामार भूमिगत खदान पहले से स्थित है। - 10 जून