लेख
10-Jun-2026
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मोदी सरकार की सबसे बड़ी उज्ज्वला योजना जिसका प्रचार-प्रसार देश और विदेश तक मोदी सरकार ने किया था अब इस योजना में सरकार लगातार कटौती करती चली जा रही है। इसको लेकर मोदी सरकार के प्रति एक नई अवधारणा बनना शुरू हो गई है, जिसमें यह कहा जा रहा है जिस योजना को सरकार अपनी सफलता के मानदंड में पिछले एक दशक से 10 करोड़ महिलाओं को सब्सिडी के गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की बात कर रही थी इस योजना में 1 वर्ष में पहले 12 सिलेंडर देने की व्यवस्था थी उसे घटाकर 9 किया गया फिर 6 किया गया और अब सरकार ने चार सिलेंडर देने का निर्णय किया है। उज्जवला योजना के तहत 10 करोड़ गरीब महिलाओं का पंजीयन है। 642 रुपए प्रति सिलेंडर में इन्हें 14 किलो का सिलेंडर मिल रहा था जो अब 12 से घटकर चार पर आ गया है। सरकार इसमें 25000 करोड़ रुपए की सब्सिडी को कम करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर गरीब महिलाओं की आंखों में आंसू नहीं आएं इसके लिए उज्जवला योजना का प्रचार सारे देश में, हर चुनाव में करते हैं। महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में जब सरकार ने मनरेगा योजना को अभी बंद करके रखा है इसी बीच उज्ज्वला योजना के सिलेंडर घटा कर सबसे गरीब महिलाओं के ऊपर कुठाराघात किया है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस पर तीव्र कटाक्ष करते हुए सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस का कहना है मोदी सरकार गरीबों का निवाला छिनती चली जा रही है। वहीं दूसरी तरफ वह पूंजीपतियों को लगातार राहत पहुंचा रही है। केंद्र सरकार ने कच्चे तेल, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी में जो एक्साइज ड्यूटी घटाई है इसका लाभ कंपनियों को मिला है। उपभोक्ताओं से लगातार डीजल-पेट्रोल, एलपीजी के बड़े हुए दाम वसूल किये जा रहे हैं। अब तो हद हो गई है, पहले केंद्र सरकार ने मनरेगा को बंद किया, अब इसके बाद उज्ज्वला योजना के तहत जो एलपीजी सिलेंडर सब्सिडी के दाम पर 10 करोड़ गरीब महिलाओं को मिल रहे थे अब उन महिलाओं को आर्थिक संकट में इस सरकार ने डाल दिया है। कांग्रेस ने इसे बहुत बड़ा मुद्दा बना लिया है। सरकार की आर्थिक स्थिति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। उसमें उज्ज्वला योजना के तहत यदि सरकार गरीब महिलाओं को नाराज कर सकती है तो यह भी कहा जा रहा है, सरकार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। बीच में सोना बेचने की भी खबर आई थी। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई, लेकिन जिस तरह से सरकार की आर्थिक स्थिति को लेकर आए दिन नए-नए समाचार सुनने को मिल रहे हैं उसको देखते हुए अब सरकार के लिए चुनौतियां बढ़ती चली जा रही हैं। सरकार विभिन्न मामलों में जिस तरह से घिरी हुई है उसके बाद भी जब महंगाई, बेरोजगारी निरंतर बढ़ रही हो सरकार के खिलाफ आंदोलन हो रहे हों, ऐसे समय पर सरकार यदि इस तरह के निर्णय ले रही है तो इसका यही अर्थ निकाला जा रहा है कि भारत सरकार गहरे आर्थिक संकट में फस गई है। आयात लगातार बढ़ता चला जा रहा है। डॉलर और अन्य विदेशी मुद्रा की तुलना में भारतीय रुपए में लगातार गिरावट बनी हुई है। विदेशी मुद्रा भंडार में भी जबरदस्त दबाव है। किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है। खाद की सब्सिडी भी सरकार द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से कम की गई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यही कहा जा सकता है, सरकार जिस तरह से निर्णय ले रही है उसको देखते हुए भविष्य में सरकार को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। शेयर बाजार में भी लगातार गिरावट का दौर देखने को मिल रहा है। बैंकों का पैसा बड़े पैमाने पर शेयर बाजार में लगा हुआ है। म्युचुअल फंड ने भी कंपनियों में बड़ा निवेश करके रखा है। यहां पर भी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को घाटा उठाना पड़ रहा है। उज्ज्वला योजना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता वाली योजना थी। 10 करोड़ महिलाओं को नाराज करना सरकार के लिए आसान नहीं था लेकिन यदि ऐसा निर्णय हुआ है तो निश्चित रूप से सरकार के ऊपर भयंकर आर्थिक दबाव है। महंगाई और बेरोजगारी को देखते हुए इस तरह की स्थिति सभी की चिंता को बढ़ा रही है। ईएमएस / 10 जून 26