क्षेत्रीय
10-Jun-2026
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रायपुर(ईएमएस)। राजधानी में लगातार बढ़ रहे साइबर फ्रॉड मामलों को देखते हुए रायपुर पुलिस अब बैंकिंग सिस्टम में सख्ती बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है। पुलिस ने उन लोगों पर विशेष निगरानी की योजना बनाई है, जो अलग-अलग बैंकों में बार-बार खाते खुलवाते हैं और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं। इसी मुद्दे को लेकर रायपुर में सभी प्रमुख बैंकों के नोडल अधिकारियों की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन और ठगी की रकम को तुरंत रोकने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठग अक्सर फर्जी या किराए पर लिए गए बैंक खातों का उपयोग करते हैं। कई मामलों में एक ही व्यक्ति अलग-अलग बैंकों में कई खाते खोलकर ठगी की रकम को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर देता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए ट्रेल ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बैंकों को ऐसे संदिग्ध खाताधारकों की पहचान कर उनकी जानकारी समय पर पुलिस से साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि हर बैंक शाखा में कानूनी मामलों के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए और लीगल डिपार्टमेंट का स्थायी संपर्क नंबर जारी किया जाए, ताकि किसी भी अधिकारी के स्थानांतरण के बाद भी जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि साइबर अपराधों की जांच में देरी का एक बड़ा कारण बैंकों से समय पर जानकारी न मिलना है, जिसे अब व्यवस्थित किया जाएगा। इसके अलावा सभी बैंक शाखाओं में CCTV व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। पुलिस ने निर्देश दिए कि बैंक के मुख्य द्वार के साथ-साथ पीछे के हिस्सों में भी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं और उनकी जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होकर बैंक पहुंचता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके लिए सभी शाखाओं में इस नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने नए बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया में भी सख्ती की बात कही है। अब मोबाइल नंबर और पहचान का भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया जाएगा। वहीं कॉर्पोरेट खातों के मामले में 15 दिन बाद पुनः पते के सत्यापन का सुझाव दिया गया है। बैठक में संदिग्ध लेन-देन (Suspicious Transactions) की निगरानी को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दी जाए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। सत्यप्रकाश(ईएमएस)10 जून 2026