क्षेत्रीय
10-Jun-2026
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- 15 जून को होगी सुनवाई; तीन लोग रिश्वत केस में गिरफ्तार रायपुर (ईएमएस)। धरसींवा थाना क्षेत्र के सिलयारी में 13 वर्षीय नाबालिग से कथित दुष्कर्म और अपहरण के मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और इस प्रकरण की सुनवाई 15 जून 2026 को निर्धारित की गई है। आयोग को यह मामला 4 जून को सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रकाशित खबरों के जरिए संज्ञान में आया, जिसके बाद तत्काल प्रकरण दर्ज कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। आयोग ने इसे नाबालिग सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मामला बताते हुए गंभीरता से जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि प्रारंभिक चरण में नाबालिग द्वारा घटना से इनकार किए जाने के कारण मामले को बंद करने की प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि बाद में वायरल वीडियो, ऑडियो और दोबारा जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर दुष्कर्म के आरोपों की पुष्टि होने पर पुलिस ने कार्रवाई की। जांच में कथित लापरवाही पाए जाने पर सिलयारी चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में अब नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने जांच के दौरान यह खुलासा किया कि मामले को दबाने के लिए कथित तौर पर 1.30 लाख रुपये की लेन-देन हुई थी। इस आरोप में पीड़िता के दादा सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता के दादा ने मुख्य आरोपी के परिजनों से मामले को दबाने के एवज में 1 लाख 30 हजार रुपये नकद लिए थे। जांच में इस लेन-देन का वीडियो भी पुलिस को मिला है। आरोप है कि दादा ने एक अन्य आरोपी को फोन पर धमकी भी दी थी। इस मामले में सीताराम मेडिकल स्टोर संचालक चंद्रशेखर यदु और टुकेन्द्र वर्मा को भी आरोपी बनाया गया है। तीनों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने दादा के कब्जे से 1 लाख रुपये नकद भी जब्त किए हैं। वहीं, दुष्कर्म के दो आरोपी पहले से ही जेल में हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और घटनाक्रम की गहन जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन परिस्थितियों में मामला दबाने की कोशिश की गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। बाल आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने पीड़िता और उसके परिजनों का बयान दर्ज कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पीड़िता और अभिभावकों को सुनवाई के लिए आयोग के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया है। आयोग सुनवाई के दौरान पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम और अन्य कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की भी समीक्षा करेगा। - (ईएमएस) 10 जून 2026