चंडीगढ़ (ईएमएस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि संसद और विधानसभाओं में बार-बार होने वाले व्यवधान लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समस्या का समाधान विधायी संस्थाओं के भीतर ही निहित है और इसके लिए जनप्रतिनिधियों को जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप आचरण, संवाद और सार्थक चर्चा को बढ़ावा देना होगा। बिरला मंगलवार को चंडीगढ़ में आयोजित द्वितीय राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र, जोन-दो सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों का सबसे बड़ा दायित्व जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास मजबूत करना है। उनके अनुसार सम्मेलन चार महत्वपूर्ण प्रस्तावों के साथ संपन्न हुआ, जो देश की विधायी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में आधार तैयार करेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, छात्र जीवन से ही संविधान के प्रति जागरूकता और कर्तव्यबोध विकसित करने तथा राज्यों के विकास को राष्ट्रीय विकास का आधार बनाने पर विशेष बल दिया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सम्मेलन में देश के 12 राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्षों ने भाग लिया। दो दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 40 वक्ताओं ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के बीच संवाद एवं सहभागिता बढ़ाने के लिए जनसंपर्क और जन-जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने का भी संकल्प लिया गया। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/10/ जून /2026