10-Jun-2026
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- 1,470 गुमशुदा लोगों को परिवारों से मिलाया * एक माह के विशेष राज्यव्यापी अभियान में वर्षों पुराने मामलों को फिर खोला गया, कई राज्यों में चलाए गए खोज अभियान से मिली सफलता * 2007 से दर्ज 24,767 गुमशुदगी मामलों की समीक्षा; किशोरियों के लापता होने के पीछे प्रेम संबंध, पारिवारिक तनाव और घर छोड़ने की प्रवृत्ति प्रमुख कारण अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात में नागरिकों की सुरक्षा तथा गुमशुदा व्यक्तियों को उनके परिजनों से पुनर्मिलन कराने के उद्देश्य से गुजरात पुलिस द्वारा एक माह का राज्यव्यापी विशेष अभियान ‘ऑपरेशन मिलाप’ चलाया गया। इस अभियान के तहत पुलिस ने 1,470 गुमशुदा व्यक्तियों का सफलतापूर्वक पता लगाकर उन्हें उनके परिवारों से मिलाने में सफलता हासिल की। 7 मई को शुरू किए गए इस विशेष अभियान के दौरान वर्षों पुराने गुमशुदगी के मामलों को दोबारा खोला गया और उनकी व्यापक समीक्षा की गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2007 से अब तक गुजरात में कुल 24,767 लोगों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए हैं। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में गुजरात पुलिस महिला सुरक्षा, बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा, मादक पदार्थों के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई, अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को आगे बढ़ा रही है। ‘ऑपरेशन मिलाप’ इसी व्यापक प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। गुजरात पुलिस महानिदेशक जी. एस. मलिक ने कहा, “गुमशुदा व्यक्तियों की खोज के लिए चलाया गया विशेष अभियान भले ही पूरा हो गया हो, लेकिन हमारे प्रयास यहीं समाप्त नहीं होंगे। सभी पुलिस अधिकारियों को नियमित पुलिस कार्यों के साथ-साथ गुमशुदगी के मामलों में लगातार कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।” गुजरात सीआईडी क्राइम (महिला सेल) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अजय चौधरी ने बताया कि यह अभियान तकनीकी विश्लेषण और खुफिया सूचनाओं के आधार पर संचालित किया गया। इसके अंतर्गत पुराने केस रिकॉर्ड की गहन समीक्षा की गई तथा जमीनी स्तर पर नए सिरे से जांच-पड़ताल की गई। पुलिस टीमों ने डिजिटल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच की। इसके अलावा शिकायतकर्ताओं और गवाहों से पुनः संपर्क कर नए सुराग जुटाने का प्रयास भी किया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, ऑपरेशन मिलाप के दौरान गुमशुदगी के मामलों के पीछे कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि गुम होने वालों में सबसे बड़ा वर्ग किशोरियों का है। अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लापता बच्चों और महिलाओं का पता लगाया गया। इनमें वर्षों से लंबित मामले भी शामिल थे। साथ ही राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी सफल खोज अभियान चलाए गए। अभियान के दौरान खोजे गए कुल 1,470 व्यक्तियों में 852 महिलाएं, 342 पुरुष, 42 नाबालिग लड़के और 234 नाबालिग लड़कियां शामिल हैं। राज्य की सभी पुलिस इकाइयों में सूरत शहर पुलिस ने सर्वाधिक 341 गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाया। मामलों के विश्लेषण से यह भी सामने आया कि विशेष रूप से 14 से 17 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों के लापता होने के पीछे प्रेम संबंध और घर से भाग जाने की घटनाएं प्रमुख कारण रहीं। इसके अतिरिक्त माता-पिता की डांट-फटकार, पढ़ाई में असफलता और पारिवारिक विवाद जैसे कारण भी महत्वपूर्ण कारक के रूप में सामने आए। वहीं रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले मजदूर परिवारों के सदस्यों के गुम होने के मामले भी बड़ी संख्या में दर्ज हुए। इस अभियान के तहत वर्ष 2007 से लंबित गुमशुदगी के मामलों को दोबारा खोलकर उनकी समीक्षा की गई, जिसके परिणामस्वरूप वर्षों से लापता और जिनके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं थी, ऐसे अनेक लोगों का सफलतापूर्वक पता लगाया जा सका। गुजरात पुलिस ने ‘ऑपरेशन मिलाप’ की सफलता का श्रेय गहन जांच, खुफिया सूचनाओं के संग्रह, मोबाइल फोन विश्लेषण, विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और परिवार परामर्श जैसी प्रभावी कार्यवाहियों को दिया है। यह पहल गुजरात पुलिस की संवेदनशील और जन-केंद्रित पुलिसिंग व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाती है तथा यह संदेश देती है कि गुमशुदा व्यक्ति का प्रत्येक मामला पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है और उसके समाधान तक प्रयास लगातार जारी रहेंगे। - 10 जून