नई दिल्ली,(इएमएस) । केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थकों द्वारा सरकार की प्रमुख उपलब्धियों को जनता के सामने रखा जा रहा है। इसी क्रम में एक सूची सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें वर्ष 2014 से 2025 तक की 12 प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। इन उपलब्धियों को मोदी सरकार के शासनकाल की बड़ी उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। सूची के अनुसार वर्ष 2014 में करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोलने वाली जनधन योजना को वित्तीय समावेशन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया गया है। वर्ष 2015 में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने का दावा किया गया है। वर्ष 2016 में उज्ज्वला योजना और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में की गई सर्जिकल स्ट्राइक को प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया गया है। वर्ष 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने, 2018 में आयुष्मान भारत योजना शुरू करने तथा 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को महत्वपूर्ण फैसलों के रूप में गिनाया गया है। वहीं 2020-21 में कोविड-19 टीकाकरण अभियान, 2022 में हर घर जल मिशन और 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता व सफल मेजबानी को उपलब्धियों की सूची में स्थान दिया गया है। सूची में वर्ष 2024 में अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को भाजपा के प्रमुख वादे की पूर्ति बताया गया है। वहीं 2025 के लिए भारत के दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सैन्य कार्रवाई को भी उपलब्धियों में शामिल किया गया है। हालांकि इन दावों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग मत हैं। समर्थक इन्हें सरकार की निर्णायक नीतियों और उपलब्धियों का प्रतीक मानते हैं, जबकि विपक्ष कई दावों के आंकड़ों और प्रभावों पर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में मोदी सरकार के 12 वर्षों की यह उपलब्धियों की सूची राजनीतिक बहस का एक महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। नंदिनी पारसी \ १० मई २०२६