क्षेत्रीय
10-Jun-2026
...


- किसानों को बताए मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के वैज्ञानिक उपाय ग्वालियर ( ईएमएस ) | कृषि भूमि को अधिक उपजाऊ और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के तहत बुधवार को विकासखंड मुरार के ग्राम उटीला में कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक खेती को बढ़ावा देने एवं रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। संगोष्ठी में दलहन निदेशालय भोपाल से आए तकनीकी अधिकारी डॉ. संदीप सिलावट ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों जैसे यूरिया और डीएपी का अत्यधिक एवं लगातार उपयोग भूमि की संरचना को प्रभावित कर रहा है, जिससे मिट्टी कठोर और कम उपजाऊ होती जा रही है। उन्होंने किसानों को दलहनी फसलों को फसल चक्र में शामिल करने की सलाह दी। डॉ. सिलावट ने कहा इससे भूमि की उत्पादन क्षमता बढ़ती है और मिट्टी का प्राकृतिक सुधार होता है। उन्होंने कम से कम तीन वर्ष में एक बार सन अथवा ढैंचा जैसी हरी खाद की फसल लगाने का भी आग्रह किया। डॉ. सिलावट ने किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत जैसे जैविक उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित किया। साथ ही जानकारी दी कि इनके माध्यम से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराए जा सकते हैं। फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए बीजामृत, दशपर्णी अर्क, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक उपाय अपनाने की सलाह भी उन्होंने दी। दलहन निदेशालय के अधिकारी श्री उमाशंकर ने कहा कि भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए फसल चक्र अपनाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों को खाद्यान्न फसलों के साथ दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाने तथा गोबर खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट जैसी जैविक खादों का उपयोग करने की सलाह दी। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री रविन्द्र सिंह कुशवाह ने किसानों को खेतों में लंबे समय तक जलभराव न होने देने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर खेतों में पानी भरकर हानिकारक लवणों को घोलकर बाहर निकाला जा सकता है, जिससे भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है। आत्मा परियोजना के बीटीएम मलखान सिंह गहलोत ने किसानों से पराली नहीं जलाने का आग्रह करते हुए कहा कि इसका उपयोग मल्चिंग के रूप में किया जा सकता है। साथ ही क्षारीय भूमि के सुधार के लिए जिप्सम के उपयोग की सलाह दी। कार्यक्रम में बीटीएम राहुल शर्मा, कृषि विस्तार अधिकारी राजेन्द्र सिंह सहित लगभग 60 किसान उपस्थित रहे।