न्यूयॉर्क,(ईएमएस)। पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में स्थापित अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने घोषणा की है कि यह विशालकाय प्रयोगशाला 2030 तक सुरक्षित तरीके से धरती पर गिराई जाएगी। इसकी नियंत्रित वापसी के लिए नासा ने करीब 9500 करोड़ रुपए (1 अरब डॉलर) का विस्तृत प्लान तैयार किया है, जिसके तहत इसके मलबे को प्रशांत महासागर में गिराया जाएगा। बीते 25 वर्षों से सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला के रूप में कार्यरत आईएसएस अब अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुका है। इसका कार्यकाल कई बार बढ़ाया जा चुका है, लेकिन लगातार तकनीकी खामियों और सुरक्षित बनाए रखने पर बढ़ते अरबों डॉलर के खर्च को देखकर नासा ने सम्मानजनक रिटायरमेंट देने का फैसला किया है। अब एजेंसी अपने संसाधनों को चंद्रमा और मंगल जैसे महत्वाकांक्षी मिशनों पर केंद्रित करना चाहती है। करीब 4.5 लाख किलोग्राम वजनी आईएसएस को यूं ही अनियंत्रित तरीके से गिरने नहीं दिया जाएगा। नासा के अनुसार, 2028 के आसपास इसकी कक्षा बनाए रखने की प्रक्रिया धीरे-धीरे बंद की जाएगी। इसके बाद एक विशेष अंतरिक्ष यान द्वारा नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में धकेला जाएगा। वायुमंडल के घर्षण से स्टेशन का अधिकांश हिस्सा जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि, इसके बाद भी बचे हुए मलबे को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर, प्रशांत महासागर में स्थित पॉइंट नीमो नामक सुनसान क्षेत्र में गिराया जाएगा। यह स्थान, जिसे अंतरिक्ष के कब्रिस्तान के रूप में जाना जाता है, 1971 से पुराने स्पेस स्टेशन और सैटेलाइट के कचरे को निपटाने के लिए उपयोग किया जाता रहा है। इसके आसपास किसी भी मानवीय बस्ती या समुद्री जहाजों का आवागमन प्रतिबंधित है। आईएसएस में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जहां एक बार में 6 से 8 लोग छह महीने तक रह सकते हैं। यह पृथ्वी से उड़ान भरने वाले बड़े अंतरिक्ष यानों के लिए एक डॉकिंग स्टेशन भी रहा है। अब तक 19 देशों के 250 से अधिक अंतरिक्ष यात्री इसका दौरा कर चुके हैं, जिनमें भारतीय अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के रिटायरमेंट के बाद, अंतरिक्ष में नए युग की शुरुआत होगी। नासा के नेतृत्व में कई निजी कंपनियां अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन विकसित कर रही हैं, जैसे कि वोस्ट कंपनी का हेवन-2, एक्सिओम का स्पेस स्टेशन, और ब्लू ओरिजिन का ऑर्बिट रीफ। चीन पहले ही अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित कर चुका है, और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भी 2035 तक अपना स्वयं का स्टेशन बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। आशीष दुबे / 10 जून 2026