‘श्री राम के प्रिय केवट’ ने भाजपा की नैया पार लगाकर इतिहास दोहराया। 2018 में मध्य प्रदेश में चुनी गई कमलनाथ सरकार के पतन के बाद से कांग्रेस के लिए चुनावी पराजयों का सिलसिला शुरू हुआ था, जो अब तक थमता नहीं दिख रहा। लोकसभा, विधानसभा और अब राज्यसभा चुनाव में भी कांग्रेस को ऐसे झटके लगे हैं, जिनसे उबरना उसके लिए कठिन होता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में कांग्रेस ने राज्यसभा की सुरक्षित (तथाकथित) मानी जाने वाली सीट भी गंवा दी। इस तरह पार्टी एक बार फिर “जीती बाजी हारने” की चर्चा के केंद्र में आ गई। नामांकन निरस्त: पूरा घटनाक्रम कांग्रेस प्रत्याशी सुश्री मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग अधिकारी ने पांच कारण दर्शाते हुए नामांकन निरस्त कर दिया। प्रमुख आधार यह था कि उन्होंने फॉर्म-26 में तेलंगाना की IV अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत लंबित कार्यवाही की जानकारी नहीं दी। दूसरा कारण: शपथ पत्र में अस्पष्ट व अधूरी सील। 3 भाग दो के विवरण में विहित प्रारूप में बदलाव। 4 फार्म के भाग बी और शपथ पत्र भाग ए में परिसंपत्तियों का मूल्य अलग-अलग था। आदेश: कितना वैध ? लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत निर्धारित फॉर्म-26 में उम्मीदवार को अपने विरुद्ध लंबित समस्त आपराधिक मामलों का विवरण देना आवश्यक है। प्रश्न यह है कि धारा 223 BNSS के तहत चल रही कार्यवाही क्या ऐसे “आपराधिक मामले” की श्रेणी में आती है, जिसकी जानकारी देना अनिवार्य था? कानूनी दृष्टि से शिकायत और प्राथमिकी में जो अंतर है, वही अंतर धारा 223 के तहत प्रारंभिक न्यायिक कार्यवाही और धारा 227 के तहत विधिवत आपराधिक अभियोजन में होता है। धारा 223 के तहत कार्यवाही मात्र एक शिकायत है, जहाँ व्यक्ति को तब तक आरोपी नहीं माना जा सकता, जब तक मजिस्ट्रेट धारा 227 के तहत उसे संज्ञान में न ले। उच्चतम न्यायालय ने सतीश उके बनाम देवेंद्र फडणवीस, (2019) 9 SCC 1 में स्पष्ट किया कि धारा 33A RP Act और नियम 4A चुनाव संचालन नियम 1961 के तहत उन मामलों का खुलासा आवश्यक है, जिनमें: 1. दो वर्ष या उससे अधिक दंड का प्रावधान हो और आरोप तय हो चुके हों, या 2. 1 वर्ष की सजा हो चुकी हो या 2. सक्षम न्यायालय ने संज्ञान ले लिया हो। मीनाक्षी नटराजन के मामले में मजिस्ट्रेट ने अभी तक धारा 227 के तहत आदेश पारित कर उन्हें आरोपी नहीं बनाया है। इसलिए सिर्फ धारा 223 की कार्यवाही आपराधिक प्रकरण की श्रेणी में नहीं आती और इसकी जानकारी देना अनिवार्य नहीं था। यही कानूनी स्थिति है। गलत जानकारी देने पर आपराधिक कार्रवाई कब? लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125A के तहत शपथ पत्र में गलत जानकारी देना या आवश्यक जानकारी छिपाना दंडनीय अपराध है। यदि निर्वाचन अधिकारी यह निष्कर्ष निकाले कि उम्मीदवार ने “महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया” है, तो धारा 125A के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है। इस मामले में रिटर्निंग अधिकारी ने तेलंगाना की अदालत में लंबित निजी शिकायत क्रमांक 4472/2025, धारा 223 की जानकारी छिपाने को मुख्य आधार माना। जबकि नटराजन का तर्क है कि संबंधित कार्यवाही ऐसी नहीं थी, जिसकी जानकारी देना विधिक रूप से अनिवार्य हो। भारतीय न्याय संहिता की धारा 229 और 230 के तहत भी शपथ पर मिथ्या कथन के लिए अलग से शिकायत हो सकती है। क्या भाजपा कोई पहल करेगी ? राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा या निर्वाचन आयोग धारा 125A RP Act के तहत मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध कोई कानूनी पहल करेगा? कांग्रेस के रिटर्निंग अधिकारी पर भाजपा के दबाव में काम करने के आरोप को बोठल करने के लिए भाजपा को प्रत्युत्तर में आपराधिक कानूनी कार्रवाई के लिए आगे आना चाहिए। विभीषण कौन? राजनीति में कहा जाता है कि “दीवारों के भी कान होते हैं”। मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध लंबित निजी शिकायत की जानकारी सार्वजनिक विमर्श में कैसे आई, यह अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। इतनी विशिष्ट जानकारी कांग्रेस के अंदर बैठे स्लीपिंग सेल की सहायता के बिना सामने आना संभव नहीं लगता। इसी कारण “घर का भेदी लंका ढाए” कौन, इस पर राजनीतिक पंडित कयास लगा कर नाम को लेकर चटकार ले रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह सीट कितनी सुरक्षित थी? कांग्रेस का दावा था कि चुनाव होते तो भाजपा की हार निश्चित थी। इसलिए भाजपा ने निर्वाचन अधिकारी का दुरुपयोग कर जीत सुनिश्चित की। लेकिन इस दावे की पोल तब खुल गई जब खरीद-फरोख्त के डर से कांग्रेस अपने विधायकों को विशेष विमान से कर्नाटक ले जा रही थी, तब केवल 48 विधायक ही थे। जीत के लिए न्यूनतम 58 प्रथम वरीयता मत आवश्यक थे। वहीं भाजपा के विधायक अपने क्षेत्रों में ही थे। कांग्रेस की “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” इस बार भी भाजपा के सामने नाकाम रही। भाजपा का यह विश्वास (शायद इसलिए जनता उन पर अंधविश्वास करती है) और कांग्रेस की उक्त आशंका अपने आप में कहानी कह देती है। प्रशिक्षण वर्ग की आवश्यकता देशहित में विपक्ष को मजबूत बनाने के लिए भाजपा, जिसे प्रशिक्षण वर्ग लगाने में महारत हासिल है, को कांग्रेस के लिए भी एक प्रशिक्षण वर्ग लगाना चाहिए। ताकि कांग्रेस कम से कम अपनी जीती हुई बाजी को बनाए रखने में सफल हो सके। कहावत है – “दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है।” कांग्रेस को इस कहावत को सिर्फ पढ़ने नहीं, रटने की जरूरत है। दूसरी कहावत ठोकर खाकर संभालने समझने की बुद्धिमानी क्या कभी कांग्रेस में आएगी? प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड कार्यकाल पर मध्य प्रदेश का तोहफा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेहरू के 64 साल पुराने 12 वर्ष से अधिक कार्यकाल का रिकॉर्ड तोड़ने के अवसर पर मध्य प्रदेश ने राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट का तोहफा देकर उनका वंदन, अभिनंदन किया। इसके लिए प्रदेश भाजपा और तीनों विजयी उम्मीदवारों को बधाई। निष्कर्ष राज्यसभा चुनाव का यह मामला केवल एक नामांकन पत्र के निरस्तीकरण तक सीमित नहीं है। यह कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारी, कानूनी सतर्कता और राजनीतिक प्रबंधन तीनों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। कांग्रेस को बाजीगरी दिखाने के लिए एक “बाजीगर” की जरूरत है। सवाल यह है कि क्या वह मिल पाएगा? (लेखक, कर सलाहकार एवं पूर्व अध्यक्ष, बैतूल सुधार न्यास) ईएमएस/11/06/2026