ज़रा हटके
11-Jun-2026
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क्वेटा,(ईएमएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) भीषण विरोध प्रदर्शनों और सरकारी दमन की चपेट में है। एक प्रमुख जेएएसी (संयुक्त सेना कार्रवाई समिति) नेता शौकत मीर ने सरकार पर नरसंहार करने और प्रदर्शनकारियों को गोली मरने देने के आदेश जारी करने का आरोप लगाया है। मीर ने दावा किया कि सुरक्षा बलों ने रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जबकि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण, अहिंसक और निहत्था था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पाकिस्तान उन्हें आतंकवादी मानता है, तब पाकिस्तान ने उनसे बातचीत क्यों की, और यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष सिर्फ बुनियादी अधिकारों के लिए है, न कि पाकिस्तानी सत्ता या राज्य के खिलाफ। इस दमन में हताहतों की संख्या पर विरोधाभासी रिपोर्टें सामने आ रही हैं। अधिकारियों ने कम से कम 11 लोगों (सात नागरिक और चार पुलिसकर्मी) की मौत और दर्जनों के घायल होने की पुष्टि की है, लेकिन जेएएसी का दावा है कि 27 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, जबकि लोकल निवासियों का कहना है कि यह संख्या 100 से अधिक है। करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं, जिससे पीओजेके दुनिया से कट गया है। प्रशासन ने दमन को तेज करने के लिए संघीय सरकार से 14,000 तक अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की मांग की है। जेएएसी 1947 के बाद मुख्य भूमि पाकिस्तान में बसे जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की मांग कर रही है। उनका आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल पाकिस्तानी मुख्यधारा की पार्टियां क्षेत्र में सरकार गठन को प्रभावित करने के लिए करती हैं, और इन्हें हटाना अधिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण है। जेएएसी ने मंगलवार को पूरे क्षेत्र में हड़ताल का आह्वान किया है, जो 27 जुलाई को होने वाले स्थानीय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया के साथ मेल खाता है। इस महीने की शुरुआत में, सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। आशीष/ईएमएस 11 जून 2026