ज़रा हटके
11-Jun-2026
...


बीजिंग (ईएमएस)। चीन में शिकारी डायनासोर का लगभग 120 मिलियन साल पुराना जीवाश्म मिला, जिसे वैज्ञानिकों ने जियान चांग्माएंसिस नाम दिया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह खतरनाक जीव दुनिया के सबसे डरावने विलोसिरेप्टर डायनासोर का रिश्तेदार था, लेकिन इसकी सबसे विशिष्ट पहचान इसके चार पंख और एक लंबी पूंछ थी। चीन के चांग्मा बेसिन में मिले इस बेहद अनोखे जीवाश्म ने प्राचीन पारिस्थितिकी के एक बड़े रहस्य को उजागर किया है। यह जीवाश्म एक शिकारी डायनासोर का है। यह बाज की तरह ताकतवर उड़ान भरने में सक्षम नहीं था, बल्कि एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर उड़ती गिलहरी की तरह ग्लाइड करता था, अपने शिकार पर अचानक झपट्टा मारने के लिए। चांग्मा बेसिन का यह इलाका सालों से प्राचीन पक्षियों के अजीबोगरीब जीवाश्मों के लिए जाना जाता रहा है। वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात से हैरान थे कि इन पक्षियों को कौन सा शिकारी खाता था। उल्लू के उगले हुए भोजन के टुकड़ों जैसे दिखने वाले इन अवशेषों ने वैज्ञानिकों को हमेशा परेशान किया था। अब इस नए मांसाहारी डायनासोर की खोज ने सदियों पुराने इस बड़े रहस्य को पूरी तरह सुलझा दिया है। फील्ड म्यूजियम की एसोसिएट क्यूरेटर जिंगमाई ओ कॉनर ने बताया, ‘यह उस साइट पर मिला इकलौता मांसाहारी जीव है जो पक्षी नहीं था।’ यह खोज न केवल एक नए डायनासोर को दुनिया के सामने लाती है, बल्कि उस समय के खाद्य श्रृंखला को भी समझने में मदद करती है। जियान चांग्माएंसिस नाम चीनी लोककथाओं के एक पंख वाले पौराणिक जीव से प्रेरित है। यह डायनासोर माइक्रोरेप्टर ग्रुप से संबंध रखता था, जिसके शिकारी जीव आमतौर पर कौवे के आकार के बहुत छोटे और फुर्तीले होते थे। हालांकि, जियान चांग्माएंसिस अपने समूह के बाकी जीवों से आकार में काफी बड़ा था। वैज्ञानिकों को अभी तक इसके ऊपरी हाथ का केवल एक हिस्सा ही मिला है, जिसके आधार पर उन्होंने अनुमान लगाया है कि इस डायनासोर के पंखों का फैलाव करीब चार फीट का रहा होगा। यह आकार आज के समय के एक बड़े बारन उल्लू के बराबर है, जो इस जीव की प्रभावशाली शारीरिक संरचना को दर्शाता है। बड़े आकार के बावजूद, यह अपने छोटे रिश्तेदारों जैसा ही दिखता था। शोधकर्ताओं के अनुसार, जियान की शारीरिक बनावट बहुत ही अनोखी थी, जो इसे हवा में ग्लाइड करने में मदद करती थी। इसके आगे के दोनों हाथों पर बड़े पंख मौजूद थे, और इसके पीछे के दोनों पैरों पर भी छोटे पंख विकसित थे। इन चार पंखों की मदद से यह आसमान में ऊंची उड़ान भरने की ताकत नहीं रखता था, बल्कि जिंगमाई ओ कॉनर के शब्दों में, ‘जियान असली उड़ान भरने में सक्षम नहीं था, बल्कि यह सिर्फ उड़ती गिलहरी की तरह ग्लाइड करता था।’ यह अपने शिकार पर अचानक ऊपर से झपट्टा मारता था, और इसके पंख हवा में संतुलन बनाने तथा दूरी तय करने के काम आते थे। कार्नेगी म्यूजियम के क्यूरेटर मैट लैमन्ना ने इस खोज के महत्व पर जोर देते हुए कहा, ‘दशकों से चांग्मा साइट पक्षियों के जीवाश्मों के लिए मशहूर रही है।’ इस नए डायनासोर की खोज से इस पूरे इलाके के क्रेटेशियस काल के इतिहास को समझने में मदद मिलेगी, जिससे आज के समय के पक्षियों के विकास क्रम को जानना आसान हो जाएगा। मैट लैमन्ना ने आगे कहा, ‘अब जियान की खोज से हमें आखिरकार पता चल गया है कि इन प्राचीन पक्षियों का असली शिकारी कौन था।’ सुदामा/ईएमएस 11 जून 2026