ताइपे,(ईएमएस)। चीन के साथ लगातार बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच ताइवान ने अपनी मारक क्षमता और युद्ध तैयारियों का एक बड़ा प्रदर्शन किया है। ताइवान की सेना ने पहली बार अमेरिका द्वारा निर्मित आधुनिक हाईमार्क (हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम) से रॉकेट दागकर लाइव फायर युद्धाभ्यास किया। यह महत्वपूर्ण अभ्यास रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील ताइवान स्ट्रेट (ताइवान जलडमरूमध्य) में आयोजित किया गया, जो ताइवान और चीन को भौगोलिक रूप से अलग करने वाला एक मुख्य समुद्री क्षेत्र है। ताइवान के सैन्य अधिकारियों ने इस युद्धाभ्यास की पुष्टि करते हुए बताया कि इस विशेष ड्रिल का एकमात्र उद्देश्य संभावित चीनी सैन्य आक्रमण या मुख्य भूमि पर हमले की स्थिति में अपनी सेना की तत्काल तैनाती और दुश्मन के ठिकानों पर बेहद सटीक जवाबी हमला करने की क्षमता को परखना था। इस आक्रामक युद्धाभ्यास के दौरान ट्रक-माउंटेड आधुनिक हाईमार्क लॉन्चरों को बेहद कम समय में फायरिंग पोजिशन पर लाया गया और कमान मिलते ही एक के बाद एक कई रॉकेट दागे गए। ताइवान की सेना ने स्पष्ट किया कि यह अभ्यास उनकी बहुप्रचारित ‘शूट एंड स्कूट’ रणनीति का एक अहम हिस्सा था। इस खास सैन्य तकनीक के तहत हमला करने के तुरंत बाद सैन्य वाहन और लॉन्चर अपनी स्थिति बदल लेते हैं, जिससे दुश्मन सेना जवाबी कार्रवाई में उन्हें निशाना न बना सके। सैन्य सार्जेंट वांग मिंग-हुई ने देश की रक्षा का संकल्प दोहराते हुए कहा कि सीमाओं पर मौजूदा दुश्मन के बड़े खतरे को देखते हुए ताइवान की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण को लगातार जारी रखा जाएगा। हालांकि, ताइवान की सेना ने यह भी साफ किया कि इस ड्रिल में इस्तेमाल किए गए रॉकेट केवल प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए सीमित दूरी वाले थे, जिन्होंने समुद्र में पूर्व निर्धारित दूरी तय कर पानी में सटीक प्रहार किया। इस ड्रिल में हाईमार्क के अलावा 155 मिमी की शक्तिशाली सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोपों को भी शामिल किया गया था। 150 किमी दूर अचूक निशाना लगाने की क्षमता अमेरिकी सेना का यह अत्याधुनिक रॉकेट सिस्टम यूक्रेन युद्ध में रूस के खिलाफ अपनी अचूक क्षमता साबित कर चुका है। ट्रकों पर सवार होने के कारण इसे बहुत तेजी से युद्ध क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है। यह जीपीएस-गाइडेड रॉकेटों की मदद से दुश्मन के कमांड सेंटरों, बड़े हथियार डिपो और सैन्य ठिकानों पर काफी अंदर तक हमला करने में सक्षम है। यह जीएमएलआरएस रॉकेटों के जरिए 70 से 150 किलोमीटर और एटीएसीएमएस मिसाइलों की मदद से 300 किलोमीटर की दूरी तक विनाशकारी प्रहार कर सकता है। गौरतलब है कि चीन हमेशा से लोकतांत्रिक ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता आया है और चीनी नेतृत्व बार-बार कह चुका है कि वे जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग करके भी ताइवान का मुख्य भूमि में एकीकरण करेंगे। हाल के दिनों में चीन के दर्जनों युद्धपोत और लड़ाकू विमान ताइवान की सीमा के करीब मंडराते देखे गए हैं, जिसके जवाब में ताइवान का यह आधुनिक मिसाइल अभ्यास सीधे तौर पर बीजिंग को अपनी रक्षात्मक संप्रभुता का कड़ा संदेश है। वीरेंद्र/ईएमएस/11जून2026