राज्य
11-Jun-2026
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* पीएम-कुसुम योजना ने गुजरात के दूरदराज़ इलाकों में लिखी विकास की नई कहानी, हजारों किसान बने आत्मनिर्भर गांधीनगर (ईएमएस)| एक समय था जब गुजरात के डांग जिले के उमरपाड़ा गांव के किसान रामू वाघमारे का जीवन पूरी तरह बारिश पर निर्भर था। यदि मानसून अच्छा होता तो फसल अच्छी होती, अन्यथा पूरे वर्ष आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता। सिंचाई के लिए रात में खेतों पर जाना पड़ता था और बिजली की अनिश्चित आपूर्ति तथा पानी की कमी उनकी रोज़मर्रा की वास्तविकता थी। आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। उनके खेत में स्थापित सोलर पंप सूर्योदय से सूर्यास्त तक लगातार पानी उपलब्ध कराता है। अब उन्हें सिंचाई के लिए रातभर जागना नहीं पड़ता और वे साल में एक से अधिक फसलें लेने में सक्षम हो गए हैं। इस परिवर्तन के पीछे केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में विकास का नया अध्याय लिख रही है। राज्य में वर्तमान में 21 हजार से अधिक सोलर वाटर पंप संचालित हैं। नर्मदा, डांग और तापी जैसे जिलों में हजारों किसान अब डीजल के खर्च, बिजली की अनिश्चितता और वर्षा पर निर्भरता से मुक्त होकर आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। तापी जिले के गवाण गांव के किसान गावजी वसावा बताते हैं कि पहले खेती केवल मानसून तक सीमित थी, लेकिन अब सोलर पंप की सहायता से पूरे वर्ष खेती संभव हो गई है। किसान एक से अधिक फसलें ले रहे हैं और खेतों में पशुओं के लिए चारा उगाकर पशुपालन से अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। नर्मदा जिले के जूना मोसदा गांव के ईश्वर वसावा के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं रही। पहले खेती से पर्याप्त आय न मिलने के कारण उन्हें रोजगार के लिए शहरों में मजदूरी करनी पड़ती थी, लेकिन अब वे वर्ष में तीन फसलें ले रहे हैं और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। * आंकड़ों में दिख रही योजना की सफलता पीएम-कुसुम योजना की सफलता केवल किसानों के अनुभवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक प्रभाव में भी दिखाई देती है। योजना के कंपोनेंट-सी के अंतर्गत गुजरात में 695 मेगावाट क्षमता वाले 256 सोलर पावर प्लांट कार्यरत हैं, जिनकी मदद से लगभग 2.97 लाख कृषि पंपों का सोलरीकरण किया जा चुका है। 81 मेगावाट क्षमता के साथ राजकोट जिला इस क्षेत्र में राज्य में अग्रणी है। ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल के अनुसार, यह योजना किसानों को ऊर्जा और जल सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ डीजल के उपयोग में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। * योजना के तीन प्रमुख घटक ऊर्जा मंत्री ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत तीन प्रमुख घटक—कंपोनेंट ए, बी और सी—लागू किए गए हैं। कंपोनेंट-ए इस घटक के तहत 163 मेगावाट क्षमता के पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किए गए हैं, जिन पर वर्तमान में कार्य प्रगति पर है। कंपोनेंट-बी यह घटक उन दूरदराज़, वन एवं आदिवासी क्षेत्रों के लिए है जहां ग्रिड बिजली उपलब्ध नहीं है या तकनीकी एवं व्यावसायिक दृष्टि से बिजली आपूर्ति संभव नहीं है। इसके तहत डीजल पंपों के स्थान पर स्टैंड-अलोन सोलर कृषि पंप स्थापित किए जाते हैं। योजना के अनुसार किसानों को कुल लागत का 30 प्रतिशत केंद्र सरकार तथा 30 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। शेष 40 प्रतिशत राशि किसान को वहन करनी होती है। यह सहायता 7.5 हॉर्स पावर (एचपी) तक की क्षमता वाले पंपों के लिए उपलब्ध है। * आदिवासी किसानों के लिए विशेष प्रावधान राज्य सरकार ने वन एवं आदिवासी क्षेत्रों के किसानों के लिए विशेष उदारता दिखाई है। इन क्षेत्रों के किसानों को केंद्र सरकार की ओर से 30 प्रतिशत और राज्य सरकार की ओर से 70 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाती है। परिणामस्वरूप किसानों को अपनी जेब से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ता। वहीं गैर-आदिवासी वन क्षेत्रों के किसानों को भी केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त सहायता प्राप्त होती है तथा उन्हें केवल नाममात्र का निश्चित शुल्क देना होता है। अब तक इस घटक के तहत 22,787 सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। * सिर्फ तकनीक नहीं, किसानों के विश्वास का प्रतीक आज गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में सोलर पंप केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में विश्वास, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुके हैं। यह अधिक उत्पादन, अधिक आय और बेहतर जीवन स्तर का माध्यम साबित हो रहे हैं। जब देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन के 12 वर्षों की यात्रा का उत्सव मना रहा है, तब गुजरात के इन दूरस्थ गांवों में सौर ऊर्जा केवल खेतों को ही नहीं, बल्कि हजारों किसान परिवारों के जीवन को भी नई रोशनी से आलोकित कर रही है। सतीश/11 जून