मप्र में इंफार्मर इंसेंटिव स्कीम शुरू, हेल्पलाइन नंबर 155253 पर देनी होगी सूचना भोपाल (ईएमएस)। खाद की कालाबाजारी रोकने में नाकाम सरकार अब वैश्विक संकट के बीच होने वाली खाद की किल्लत को देखते हुए अवैध भंडारण, अवैध बिक्री और कालाबाजारी तथा नकली खाद की बिक्री को लेकर चिंतित है। खरीफ फसल के दौरान अवैध भंडारण और बिक्री पर कंट्रोल के लिए सरकार ने इंफार्मर इंसेंटिव स्कीम (सूचनादाता प्रोत्साहन योजना) शुरू की है। इस योजना में कालाबाजारी और अवैध खाद भंडारण, बिक्री की जानकारी देने वाले को 1000 रुपए का ईनाम दिया जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की काली छाया बारिश शुरू होते ही किसानों की खाद सप्लाई पर भी पडऩे वाली है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने प्रदेश में अवैध खाद बिक्री, अनाधिकृत भंडारण, कालाबाजारी, नकली एवं मिलावटी खाद के निर्माण और वितरण जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए योजना लागू करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार खाद की कालाबाजारी, नकली खाद निर्माण तथा अनुदान के रूप में मिलने वाली खाद के औद्योगिक उपयोग जैसी शिकायतों को रोकने के लिए आम नागरिकों और किसानों की सहभागिता से इस पर एक्शन होगा। योजना का संचालन पूरे मध्यप्रदेश में किया जाएगा। कौन दे सकता है सूचना योजना के अंतर्गत कोई भी नागरिक, किसान या व्यापारी अवैध गतिविधियों की सूचना दे सकता है। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और उसकी अनुमति के बिना किसी स्तर पर उजागर नहीं की जाएगी। सूचना शासकीय कार्य दिवस पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सीएम किसान हेल्पलाइन नंबर 155253 पर कॉल करके दी जा सकेगी। सूचना में स्थान, समय, गतिविधि का विवरण, संबंधित व्यक्ति या संस्था का नाम-पता तथा उपलब्ध साक्ष्य (फोटो, वीडियो या दस्तावेज) शामिल करना होगा। कलेक्टर देंगे ईनाम सूचना के आधार पर कलेक्टर द्वारा गठित टीम जांच करेगी, जिसमें संबंधित क्षेत्र के उर्वरक निरीक्षक को शामिल करना अनिवार्य होगा। सूचना सही पाए जाने पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। सूचना पर सफल कार्रवाई (जब्ती या दोष सिद्ध होने) की स्थिति में प्रति सूचना 1000 रूपए का प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह राशि जिला कलेक्टर द्वारा प्रदान की जाएगी। यह योजना 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। योजना के लिए कृषि वर्ष 2026-27 में विधानसभा स्तर पर उपलब्ध कराई गई राशि से प्रोत्साहन भुगतान किया जाएगा। कलेक्टर जांच के बाद इस राशि का भुगतान सूचनादाता के बैंक खाते में कराएंगे। विनोद/ 11 जून /2026