राष्ट्रीय
11-Jun-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। देश की राजनीति में महिला मतदाता तेजी से सबसे प्रभावशाली वोट बैंक के रूप में उभर रही हैं। इसी बीच कांग्रेस शासित राज्यों में महिलाओं को केंद्र में रखकर शुरू की गई योजनाओं ने राजनीतिक बहस को नया आयाम दे दिया है। एक ओर केरल में महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की घोषणा की गई है, वहीं तेलंगाना में महिला स्वयं सहायता समूहों को 553 बसें सौंपकर उन्हें हर महीने लगभग 70 हजार रुपये की आय उपलब्ध कराने की योजना शुरू की गई है। केरल सरकार की यह योजना 15 जून से लागू होगी। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी तथा उनके घरेलू खर्च में भी कमी आएगी। यह योजना कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुनावी गारंटियों का हिस्सा रही है। वहीं तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने महिला स्वयं सहायता समूहों को बसों का स्वामित्व देकर उन्हें आय अर्जित करने का अवसर प्रदान किया है। राज्य परिवहन निगम इन बसों को किराये पर लेगा और संबंधित समूहों को नियमित आय मिलेगी। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस मॉडल का और विस्तार करना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं का मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ने और कई राज्यों में पुरुषों के बराबर या उससे अधिक होने के कारण राजनीतिक दल अब महिलाओं को अपनी रणनीति के केंद्र में रख रहे हैं। कांग्रेस इन योजनाओं को महिला सशक्तिकरण का मॉडल बता रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी लाभ हासिल करने की कोशिश करार दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा, आर्थिक सहायता, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाएं प्रमुख चुनावी मुद्दे बन सकती हैं। ऐसे में महिला मतदाताओं का समर्थन हासिल करना राजनीतिक दलों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होता जा रहा है। सुबोध/११-०६-२०२६