नई दिल्ली (ईएमएस)। असम और नागालैंड के बीच दशकों से चला आ रहा सीमा एवं ऊर्जा संसाधनों का विवाद अब समाधान की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित पेट्रोलियम ब्लॉकों को लेकर सहमति बनने की खबर है, जिससे जल्द ही तेल और गैस उत्पादन दोबारा शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठकों के बाद एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस समझौते का उद्देश्य उन जटिल मुद्दों को सुलझाना है, जिनके कारण वर्षों से सीमावर्ती क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज तथा उत्पादन प्रभावित रहा है। इस पहल के सफल होने पर न केवल रुकी हुई परियोजनाएं फिर से शुरू हो सकेंगी, बल्कि नए तेल और गैस ब्लॉकों की नीलामी का रास्ता भी खुल जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और दोनों राज्यों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। गौरतलब है कि असम और नागालैंड के बीच सीमा विवाद छह दशक से अधिक पुराना है। इससे पहले भी हिमंत बिस्वा सरमा और नेफियू रियो के बीच हुई बैठकों में विवादित क्षेत्रों में तेल अन्वेषण और रॉयल्टी साझा करने के सिद्धांत पर सहमति बनी थी। दोनों नेताओं ने आर्थिक विकास और क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो यह केवल ऊर्जा क्षेत्र के लिए ही नहीं बल्कि असम और नागालैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे पूर्वोत्तर भारत के आर्थिक विकास को नई गति मिलने की संभावना है। सुबोध/११-०६-२०२६