राष्ट्रीय
11-Jun-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी प्रशासन ने एक बड़ा संकेत दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र के अमेरिकी सहयोगी देशों को पहुंचाए गए नुकसान की भरपाई के लिए ईरान की जब्त या फ्रीज की गई संपत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बयान ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को नया राजनीतिक और आर्थिक आयाम दे दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन खाड़ी देशों में हुए नुकसान का आकलन कर रहा है। इसके बाद यह तय किया जा सकता है कि ईरान की विदेशों में जमा अरबों डॉलर की संपत्तियों का कितना हिस्सा पुनर्निर्माण और मुआवजे के लिए उपयोग किया जाए। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यदि किसी देश की कार्रवाई से सहयोगी देशों को नुकसान पहुंचा है तो उसकी आर्थिक जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि ईरान की संपत्तियां किसी के लिए “भुगतान कोष” नहीं हैं और बिना सहमति के उनका उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरानी संपत्तियों की जब्ती या पुनर्वितरण से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित अंतरिम समझौते को लेकर बातचीत भी जारी है। वार्ताओं में ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों की रिहाई भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है। दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और कूटनीतिक प्रयास समानांतर रूप से जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में ईरानी फंड का उपयोग खाड़ी देशों को मुआवजा देने के लिए करता है, तो इससे पहले से जटिल अमेरिका-ईरान संबंधों में और अधिक तनाव पैदा हो सकता है तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है। सुबोध/११-०६-२०२६