नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रस्तावित कानूनी सुधारों और नीतिगत बदलावों से फ्रांस के साथ नागरिक परमाणु सहयोग को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु दायित्व व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने से लंबे समय से लंबित परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आ सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए व्यापक सुधारों पर विचार कर रही है। इन सुधारों का उद्देश्य निवेशकों का भरोसा बढ़ाना, नई तकनीकों को अपनाना और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग को मजबूत करना है। माना जा रहा है कि इससे फ्रांस की प्रमुख परमाणु ऊर्जा कंपनियों के लिए भारत में निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। महाराष्ट्र के जैतापुर में प्रस्तावित यह परियोजना भारत और फ्रांस के बीच नागरिक परमाणु सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। यदि नियामकीय और कानूनी बाधाएं कम होती हैं, तो इस परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में परमाणु ऊर्जा को स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार आवश्यक है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत और फ्रांस के बीच पहले से मजबूत रणनीतिक संबंध हैं। रक्षा, अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी के बाद अब परमाणु ऊर्जा सहयोग दोनों देशों की साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकता है। कानूनी सुधारों के सफल क्रियान्वयन से न केवल फ्रांसीसी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी नई मजबूती मिलेगी। सुबोध/११-०६-२०२६