- गीता भवन में भागवत कथा के दौरान धूमधाम से मना श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह उत्सव, आज सुदामा चरित्र प्रसंग इंदौर (ईएमएस)। हमारी सनातनी संस्कृति परंपराओं और मर्यादाओं पर केंद्रित है। वर्तमान युग धर्म जागरण का है, लेकिन धर्म प्रदर्शन के लिए नहीं बल्कि दर्शन के लिए होता है। धर्म ही समाज को चैतन्यता और निर्भयता प्रदान करता है। दुनिया को हमारा धन चाहिए, लेकिन भगवान को केवल हमारा पवित्र मन चाहिए। यह दिव्य विचार वृंदावन के जगदगुरु गोपेश्वर चैतन्य महाराज ने व्यक्त किए। वे शुक्रवार को मनोरमागंज स्थित गीता भवन में मारवाड़ी माहेश्वरी प्रगति मंडल की मेजबानी में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में महारास एवं श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग पर व्याख्या दे रहे थे। कथा के दौरान रुक्मणी विवाह का उत्सव पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। जैसे ही कृष्ण-रुक्मणी ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई, पूरा सभागार जयघोष से गूंज उठा। विद्वान वक्ता ने विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या करते हुए कहा कि दुनिया स्वार्थी है, लेकिन हमारे कृष्ण सारथी हैं जो जीवन की अंतिम यात्रा तक हमारा मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ के नतीजे आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ सकते हैं। रुक्मणी विवाह नारी के आत्मसम्मान और मंगल का सूचक है। भारतीय संस्कृति में विवाह कोई सौदा नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार है। :: सखियों ने दी नृत्य की प्रस्तुति :: इससे पूर्व मंडल के अध्यक्ष रामकिशोर राठी, मंत्री मनोज धूत, श्याम सुंदर मूंदड़ा, रामप्रसाद चांडक व रामकिशन कोठारी ने व्यास पीठ का पूजन किया। उत्सव के दौरान अंजू राठी, चंदा धूत, प्रीति बंग और सुनीता लाहोटी सहित दुल्हन की सखियों के रूप में सजी महिलाओं ने मनोहारी नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में रामाजुन पलोड़, श्रीकांत तोषनीवाल, सुमित मेनानी व भरत डागा सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। :: आज होगा पूर्णाहुति सत्र :: मंडल अध्यक्ष रामकिशोर राठी ने बताया कि शनिवार को दोपहर 3 से शाम 7 बजे तक सुदामा चरित्र प्रसंग एवं व्यास पूजा होगी। इसके पश्चात रविवार सुबह 9 बजे यज्ञ-हवन के साथ कथा का विराम होगा। प्रकाश/12 जून 2026