ज़रा हटके
13-Jun-2026
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-समुंद्र में हर साल 52.1 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा फेंका जा रहा, जीव खतरा में वाशिंगटन (ईएमएस)। संयुक्त राष्ट्र की नई वर्ल्ड ओशियन असेसमेंट रिपोर्ट ने दुनिया की नींद उड़ा दी है। समुंद्र पहले से कहीं ज्यादा बड़े खतरे में है। पिछले 10 सालों में समुंद्र का सी लेवल बढ़ने की रफ्तार डबल हो गई है। इंसान की गलतियों ने समुंद्र को तबाह कर दिया है। पलूशन और बड़े लेवल पर हो रही इंडस्ट्रियल फिशिंग इसका मेन कारण है। रिपोर्ट के मुताबिक समु्ंद्र का इकोसिस्टम बहुत ज्यादा प्रेशर झेल रहा है। बायोडायवर्सिटी लगातार खत्म हो रही है। 86 देशों के 600 से ज्यादा साइंटिस्ट ने यह रिपोर्ट तैयार की है। 2021 से 2025 तक समंदर की हेल्थ को इसमें स्टडी किया गया है। इससे पहले 2018 की रिपोर्ट में भी मरीन एनवायरमेंट को हुए नुकसान की बात कही गई थी। साइंटिस्ट का कहना है कि इंसान ने समुंद्र को डस्टबिन बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2015 से पहले समुंद्र का पानी हर साल 2 मिलीमीटर बढ़ता था। 2023 में यह स्पीड बढ़कर 4.3 मिलीमीटर हो गई है। इसका सीधा मतलब है कि सी लेवल राइज डबल हो चुका है। पानी का गर्म होना भी एक बड़ा खतरा है। 1955 के बाद से समुंद्र जितना गर्म हुआ है, उसका 16 फीसदी हिस्सा सिर्फ 2018 के बाद रिकॉर्ड हुआ है। अटलांटिक ओशियन के साथ इंडियन ओशियन और पैसिफिक ओशियन के दक्षिणी हिस्से सबसे ज्यादा गर्म हो रहे हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि हम समुंद्र के बारे में बहुत कम जानते हैं। 2025 तक समुंद्र के सिर्फ 27 फीसदी हिस्से का ही मैप तैयार हो पाया है। समंदर का बहुत बड़ा हिस्सा आज भी एक रहस्य बना हुआ है। डीप सी इकोसिस्टम को समझना अभी भी वैज्ञानिकों के लिए चैलेंज है। हमें नहीं पता कि समुंद्र की गहराइयों में क्या बदलाव हो रहे हैं। वहां रहने वाले जीवों पर इन एंथ्रोपोजेनिक प्रेशर का क्या असर हो रहा है, यह जानना अभी बाकी है। समुंद्र में हर साल 52.1 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा फेंका जा रहा है। यह कोई छोटा अमाउंट नहीं है। इस प्लास्टिक के 24.4 ट्रिलियन माइक्रोप्लास्टिक पार्टिकल्स समुंद्र के पानी में घुल चुके हैं। इसका सीधा और खतरनाक असर 4000 से ज्यादा मरीन स्पीशीज पर पड़ रहा है। मछलियां और दूसरे समुद्री जीव इस कचरे को खाकर जान गंवा रहे हैं। इससे मरीन लाइफ का नेचुरल बैलेंस पूरी तरह बिगड़ गया है। यूएन के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने रिपोर्ट पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हम समुंद्र को अनलिमिटेड नहीं मान सकते हैं। उन्होंने दुनिया के सभी देशों से एक साथ मिलकर काम करने की अपील की है। उनका कहना है कि हमें समंदर के साथ एक नया रिश्ता बनाना होगा। यह रिश्ता साइंस और इंटरनेशनल लॉ पर बेस होना चाहिए। हाल ही में हाई सीज ट्रीटी लागू हुई है। इससे उन समुद्री इलाकों को बचाने में मदद मिलेगी जो किसी देश की सीमा में नहीं आते। हमारी धरती का 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा पानी से ढका है। समंदर ही हमारे ग्लोबल क्लाइमेट को कंट्रोल करता है। इंसान जो भी फॉसिल फ्यूल जलाता है, उसका 90 फीसदी एक्स्ट्रा हीट समंदर सोख लेता है। इसके अलावा 30 फीसदी कार्बन डाइऑक्साइड भी पानी में जज्ब हो जाती है। समंदर का पानी ओशियन करंट्स के जरिए हीट को ग्लोबल और लोकल लेवल पर बैलेंस करता है, लेकिन अब ओशियन करंट्स भी बदल रहे हैं। फ्यूचर के क्लाइमेट पर इसके असर को समझना अभी वैज्ञानिकों के लिए मुश्किल हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की आबादी 2024 के अंत तक 8.2 बिलियन हो चुकी है। दुनिया के एक तिहाई लोग समुंद्र से 100 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं। करीब 11 फीसदी आबादी ऐसे लैंड पर है जो सी लेवल से 10 मीटर से भी कम ऊंचे हैं। सी लेवल बढ़ने से इन लोगों के डूबने का खतरा है। इसके अलावा सोशल और जियोपोलिटिकल टेंशन भी मरीन हेल्थ को नुकसान पहुंचा रही है। ग्रीनपीस जैसी संस्थाओं ने सरकारों से तुरंत सख्त कदम उठाने की मांग की है। ग्रीनपीस के ग्लोबल ओशियन कैंपेनर लुकास मेउस ने कहा कि सरकारों को 2030 तक 30 फीसदी समुंद्र को पूरी तरह प्रोटेक्ट करना होगा। सिराज/ईएमएस 13 जून 2026