ज़रा हटके
13-Jun-2026
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लंदन (ईएमएस)। क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा पक्षी भी है जिसे छूना इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है? इस पक्षी को दुनिया का सबसे विषैला पक्षी माना जाता है। यह अनोखा और बेहद जहरीला पक्षी है हूडेड पिटोहुई, जो मुख्य रूप से न्यू गिनी के घने जंगलों में पाया जाता है। इस रहस्यमयी पक्षी की खोज 1980 के दशक में वैज्ञानिक जैक डंबाचर ने की थी। वे न्यू गिनी में अपने फील्डवर्क के दौरान थे, जब उन्होंने पहली बार इस पक्षी को पकड़ा। पक्षी को छूने के कुछ ही क्षणों बाद, जैक डंबाचर को अपने हाथों, आंखों और मुंह में एक तीखी जलन, झुनझुनी और सुन्नपन महसूस होने लगा। शुरुआती तौर पर उन्हें समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हो रहा है, लेकिन बाद में गहन जांच और शोध के बाद यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस पक्षी की त्वचा और पंखों में जानलेवा जहर मौजूद होता है। एक शोध रिपोर्ट में, जैक डंबाचर और उनकी टीम ने बताया कि हूडेड पिटोहुई के शरीर में बैट्राकोटॉक्सिन नामक एक अत्यंत खतरनाक जहर पाया जाता है। यह वही शक्तिशाली टॉक्सिन है जो कुछ बेहद विषैले मेंढकों में भी मिलता है। यह जहर पक्षी को अपने शिकारियों और परजीवियों से बचाने में एक प्रभावी सुरक्षा कवच का काम करता है। अगर कोई शिकारी इस पक्षी को खाने का प्रयास करता है, तो उसे इस जहर से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, या उसकी जान भी जा सकती है। इस खोज का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह था कि हूडेड पिटोहुई स्वयं अपने शरीर में इस जहर का निर्माण नहीं करता। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पक्षी अपनी विशेष आहार प्रणाली के माध्यम से यह जहर प्राप्त करता है। यह मेलिरिड बीटल्स नामक जहरीले कीड़ों को खाता है, जिनमें प्राकृतिक रूप से बैट्राकोटॉक्सिन मौजूद होता है। इन जहरीले कीड़ों को खाने के बाद, यह टॉक्सिन धीरे-धीरे पक्षी की त्वचा और पंखों में जमा हो जाता है, जिससे पक्षी खुद जहरीला बन जाता है। हूडेड पिटोहुई के चमकीले काले और नारंगी रंग भी एक खास उद्देश्य पूरा करते हैं। इस घटना को अपोसेमेटिज्म कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि ऐसे चमकीले और विशिष्ट रंग अन्य जीवों को चेतावनी देते हैं कि यह प्राणी खतरनाक या जहरीला हो सकता है। यही कारण है कि न्यू गिनी के स्थानीय आदिवासी और समुदाय के लोग इस पक्षी से हमेशा दूरी बनाए रखते हैं। वहां के लोग इसे अक्सर रबिश बर्ड यानी बेकार पक्षी भी कहते हैं, क्योंकि यह उनके लिए किसी काम का नहीं और छूने से भी खतरा है। वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि दुनिया में ऐसे पक्षी बेहद कम हैं जो अपनी आत्मरक्षा के लिए जहर का उपयोग करते हैं। यही कारण है कि हूडेड पिटोहुई आज भी वैज्ञानिकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए गहन अध्ययन और आश्चर्य का विषय बना हुआ है। यह पक्षी न केवल अपने विषैले गुणों के कारण अद्वितीय है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र में जीवों के बीच जटिल संबंधों को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सुदामा/ईएमएस 13 जून 2026