मुंबई (ईएमएस)। हाल ही में अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने फिल्मी दुनिया के बदलते दौर को लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि फिल्मों को समाज के साथ-साथ खुद को भी लगातार बदलना होगा, क्योंकि अगर सिनेमा समय की मांग को नहीं समझेगा, तो दर्शकों के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता कमजोर पड़ सकता है। यह एक ऐसा पहलू है जिस पर फिल्म उद्योग को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। इंटरव्यू के दौरान, जब कंगना रनौत से पूछा गया कि क्या बड़े कलाकारों की भारी फीस फिल्मों को नुकसान पहुंचाने का एक कारण बनती है, तो उन्होंने इस सवाल का बहुत ही सीधा और तार्किक जवाब दिया। उन्होंने कहा, जब कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है, तब उसके हर खर्च पर सवाल उठना शुरू हो जाता है। लोग बारीकी से यह देखने लगते हैं कि पैसा कहां और कितना खर्च किया गया। ऐसे समय में, कलाकारों की फीस से लेकर फिल्म निर्माण के हर हिस्से पर गहन चर्चा होती है। उन्होंने एक सरल उदाहरण देते हुए समझाया, अगर किसी घर की आमदनी कम हो जाए, तो परिवार स्वाभाविक रूप से अपने खर्चों को कम करने की कोशिश करता है। लोग सोच-समझकर पैसा खर्च करते हैं और गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाते हैं। ठीक इसी तरह, जब फिल्मों की कमाई कम होती है, तो इंडस्ट्री भी अपने खर्चों का हिसाब-किताब देखने लगती है। ऐसे में कलाकारों की फीस पर सवाल उठना एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। कंगना ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह केवल फीस का मामला नहीं है, बल्कि सबसे जरूरी बात यह है कि फिल्में समय के साथ बदलें और दर्शकों की नब्ज को पहचानें। उन्होंने कहा, समाज बहुत तेजी से बदल रहा है, लोगों की सोच, प्राथमिकताएं और मनोरंजन देखने का तरीका भी बदल चुका है। ओटीटी प्लेटफॉर्म और वैश्विक सामग्री की उपलब्धता ने दर्शकों की उम्मीदों को बढ़ा दिया है। इसलिए, फिल्म इंडस्ट्री को भी नई पीढ़ी और नए दर्शकों की पसंद को गहराई से समझना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा, अगर फिल्में खुद को लगातार बेहतर और अधिक प्रासंगिक बनाती रहेंगी, तभी वे आज के दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर पाएंगी और सिनेमाघरों तक लाने में सफल होंगी। कंगना की को-स्टार स्मिता तांबे ने भी इसी विषय पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि हर इंसान किसी कहानी में अपने जीवन का कोई न कोई हिस्सा देखना चाहता है। दर्शक तब ज्यादा प्रभावित होते हैं, जब उन्हें लगता है कि फिल्म की कहानी या किरदार उनके जैसे लोगों की बात कर रहे हैं और उनके अनुभवों को दर्शा रहे हैं। यही जुड़ाव किसी फिल्म को खास बनाता है और उसे दर्शकों के दिलों में जगह दिलाता है। स्मिता ने अपनी आगामी फिल्म भारत भाग्य विधाता का उदाहरण देते हुए कहा, हमारी फिल्म भारत भाग्य विधाता की कहानी आम लोगों से जुड़ी हुई है। इसमें ऐसी महिलाओं, माओं, नर्सों और कामकाजी लोगों की भावनाओं और संघर्षों को दिखाया गया है, जिनसे देश का एक बड़ा वर्ग खुद को जोड़ सकता है। जब दर्शक खुद को किसी कहानी में देखेंगे, तभी वे उस फिल्म से भावनात्मक रूप से जुड़ेंगे और उसे अपना पाएंगे। सुदामा/ईएमएस 13 जून 2026