26 साल बाद सुलझा अमेरिकी जंगल का रहस्य वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित ओलंपिक नेशनल पार्क के घने जंगलों में 26 साल तक एक ऐसा राज दफन रहा, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। एक बेहद सुनसान इलाके में पड़े पुराने टेंट के भीतर, स्लीपिंग बैग के अंदर मिला इंसानी कंकाल आखिर किसका था, यह सवाल दो दशकों से अधिक समय तक पुलिस, वैज्ञानिकों और परिजनों के लिए एक अबूझ पहेली बना रहा। अब आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान और डीएनए तकनीक ने इस गहरे रहस्य से पर्दा उठा दिया है। यह पूरी घटना किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म की तरह नजर आती है, जहां जंगल के बीचों-बीच एक टेंट में सोया हुआ इंसान फिर कभी जाग ही नहीं सका। इतने वर्षों तक इस बात का सुराग न मिल पाना कि उस व्यक्ति के साथ क्या हुआ था, लोगों में कौतूहल और डर दोनों पैदा कर रहा था। यह मामला सिर्फ एक लावारिस शव की पहचान का नहीं है, बल्कि उस असहनीय दर्द का भी है जिसे एक परिवार ने ढाई दशक से ज्यादा समय तक सीने में दबाए रखा। हाल ही में पार्क प्रशासन ने आधिकारिक खुलासा करते हुए बताया कि मृतक की पहचान जोसफ लुइस सेराओ जूनियर के रूप में हुई है। जोसफ मूल रूप से हवाई द्वीप का रहने वाला था और गायब होने से ठीक पहले वॉशिंगटन में रह रहा था। परिजनों के मुताबिक, वर्ष 1998 के बाद से जोसफ का अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ था और वे लगातार उसकी तलाश में भटक रहे थे। इस रहस्यमयी मामले की शुरुआत जुलाई 2000 में हुई थी, जब ओलंपिक नेशनल पार्क के सोल डक रिवर क्षेत्र में शोध कर रहे एक रिसर्चर को घने पेड़ों के बीच एक पुराना, जर्जर टेंट दिखाई दिया। जब उसने उत्सुकतावश टेंट के अंदर झांका, तो उसके होश उड़ गए। टेंट के भीतर एक स्लीपिंग बैग में इंसानी अवशेष सड़ चुके थे। सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन शव इस कदर क्षत-विक्षत हो चुका था कि उसकी तत्काल पहचान करना नामुमकिन था। शुरुआती जांच में अनुमान लगाया गया कि मौत करीब छह महीने पहले हुई होगी। मौके से कोई पहचान पत्र, पर्स या ठोस सुराग नहीं मिलने के कारण यह मामला धीरे-धीरे अमेरिका के सबसे पेचीदा कोल्ड केस की फाइलों में बंद हो गया। लगभग 24 साल बाद, इस ठंडे पड़ चुके मामले में एक अभूतपूर्व मोड़ आया। एक मेडिकल एक्जामिनर ऑफिस ने आधुनिक डीएनए जांच का सहारा लेने का फैसला किया। इसके लिए एक एडवांस फॉरेंसिक जीनियोलॉजी लैब को जांच का जिम्मा सौंपा गया। वैज्ञानिकों ने दशकों पुराने कंकाल के अवशेषों से बेहद सावधानीपूर्वक डीएनए निकाला और संभावित पारिवारिक कड़ियों की तलाश शुरू की। महीनों की जटिल जेनेटिक मैपिंग और कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार एक सटीक मैच मिल गया। इसके बाद आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की गई कि वह शव जोसफ लुइस सेराओ जूनियर का ही था। अधिकारियों का कहना है कि अगर आधुनिक डीएनए तकनीक इतनी उन्नत न होती, तो यह रहस्य हमेशा के लिए जंगल की परतों में ही दफन रह जाता। हालांकि, पहचान उजागर होने के बावजूद सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि आखिर जोसफ की मौत कैसे हुई? प्रशासन ने अब तक मौत के वास्तविक कारणों, जैसे कि यह हत्या थी, कोई दुर्घटना थी या प्राकृतिक मौत, इसका खुलासा नहीं किया है। कुछ अपुष्ट कयासों के अनुसार, जोसफ उस दौर में गंभीर मानसिक और आर्थिक दौर से गुजर रहा था। फिलहाल, इस जांच का मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवार को उनके खोए हुए बेटे का सच सौंपना था, जो पूरा हो चुका है। खोजी टीमों का कहना है कि इस सफलता ने साबित कर दिया है कि विज्ञान के पास हर पुराने राज को खोलने की ताकत है, भले ही उसमें समय कितना भी लग जाए। वीरेंद्र/ईएमएस 13 जून 2026