- बिजली बकाया के कारण नहीं रुकेगी पानी सप्लाई- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुंबई, (ईएमएस)। महाराष्ट्र में ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं पर बढ़ते बिजली बिलों के बकाया को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा से जोड़ने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संबंधित विभागों को इस संबंध में व्यापक नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह नीति महाराष्ट्र ऊर्जा विकास अभिकरण (मेडा) के माध्यम से तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री ने वर्षा निवास पर आयोजित ग्रामीण पेयजल नीति समीक्षा बैठक में कहा कि ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के लिए बिजली बिलों की बढ़ती देनदारी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इसलिए दीर्घकालिक समाधान के रूप में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलापूर्ति योजना के जलस्रोत, लाभार्थियों की संख्या, मोटर पंपों की क्षमता और आवश्यक बिजली खपत का अध्ययन कर सौर ऊर्जा आधारित नीति बनाई जाए। बैठक में जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील, राज्य मंत्री एडवोकेट आशीष जयस्वाल तथा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बिजली बिलों के बकाया के कारण राज्य में कहीं भी पेयजल योजना बंद नहीं होनी चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 55 लीटर पानी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने जलापूर्ति योजनाओं की मरम्मत और रखरखाव के लिए तालुका स्तर पर अलग तंत्र स्थापित करने के निर्देश भी दिए। इस व्यवस्था में ग्राम पंचायतों की भागीदारी होगी। रखरखाव का खर्च जलकर (पानी पट्टी) की वसूली से पूरा करने का प्रयास किया जाएगा, जबकि जहां वसूली कम होगी वहां स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के फंड से सहायता दी जाएगी। फडणवीस ने यह भी निर्देश दिया कि जलापूर्ति योजनाओं की मरम्मत और रखरखाव के लिए तालुका-वार अधिकृत एजेंसियों की सूची तैयार की जाए। ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर इन एजेंसियों का चयन होगा। इससे समय पर मरम्मत सुनिश्चित होगी और योजनाएं तकनीकी खराबियों के कारण बंद नहीं पड़ेंगी। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी जलस्रोत विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बार-बार नए स्रोत खोजने के बजाय मौजूदा जलस्रोतों को मजबूत करना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने ‘वीबीजी रामजी’ योजना के तहत उपलब्ध निधि का उपयोग जलस्रोतों के सशक्तीकरण के लिए करने के निर्देश दिए। जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य की 11,643 जलापूर्ति योजनाओं के मूल प्रारूप में पहले ही सौर ऊर्जा प्रणाली शामिल की जा चुकी है। इसके अलावा राज्य की कुल 22,185 जलापूर्ति योजनाओं के सौर ऊर्जीकरण का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पुनर्जोड़णी योजनाओं में 50 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा कर चुकी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर धन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही जल जीवन मिशन के अंतर्गत 100 प्रतिशत पूर्ण हो चुकी योजनाओं का सत्यापन करने के लिए भी अधिकारियों को कहा गया। राज्य सरकार का मानना है कि सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति योजनाओं से बिजली खर्च में कमी आएगी, बकाया बिलों की समस्या दूर होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति अधिक विश्वसनीय एवं सतत बन सकेगी। - १३ जून/२०२६/ईएमएस