क्षेत्रीय
13-Jun-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। जिले के पचपेड़ी क्षेत्र के ग्राम पकरिया निवासी एक ग्रामीण ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एक बैंक मैनेजर और फील्ड ऑफिसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पशुपालन ऋण दिलाने के नाम पर दस्तावेज लिए गए, लेकिन ऋण स्वीकृति की जानकारी नहीं दी गई। बाद में ऋण की राशि वसूलने के लिए दबाव बनाया गया और कथित रूप से धमकी भी दी गई। ग्राम पकरिया निवासी दिलीप कुमार लहरे ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में बताया है कि वर्ष 2024 में बैंक के मैनेजर सुमंत चौधरी और एफओएस रिकेश साहू उनके घर पहुंचे थे। उन्होंने शासन की योजना के तहत पशुपालन के लिए ऋण उपलब्ध कराने की बात कहते हुए आधार कार्ड, पैन कार्ड, ऋण पुस्तिका, बी-1, बी-2, निवास प्रमाण पत्र, फोटो सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा कराए थे। शिकायत के अनुसार, बाद में जब उन्होंने ऋण स्वीकृति की जानकारी मांगी तो उन्हें बताया गया कि ऋण स्वीकृत नहीं हुआ है और आवेदन निरस्त हो गया है। इसके बाद वे रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य स्थित ईंट-भ_े में काम करने चले गए। ऋण नहीं मिला, फिर भी वसूली का दबाव! आवेदन में दावा किया गया है कि कुछ दिन पहले बैंक मैनेजर और एफओएस फिर उनके घर पहुंचे और बैंक ऋण की किश्तें जमा करने के लिए कहा। इस पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि न तो उन्हें ऋण स्वीकृति की कोई जानकारी दी गई और न ही उन्होंने ऋण की राशि प्राप्त की है। ऐसे में ऋण चुकाने का सवाल ही नहीं उठता। दिलीप कुमार लहरे का आरोप है कि इस दौरान दोनों अधिकारियों ने उन्हें डराया-धमकाया और जेल भेजने की चेतावनी भी दी। जातिसूचक टिप्पणी का भी आरोप शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का मुद्दा उठाया, तब बैंक मैनेजर ने कथित रूप से जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणी की। आवेदन में कहा गया है कि यह टिप्पणी उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाली थी। कार्रवाई की मांग दिलीप कुमार लहरे ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित बैंक मैनेजर एवं एफओएस के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे तथ्य मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के आवेदन पर आधारित हैं। बैंक प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत में किए गए दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस द्वारा मामले की जांच के उपरांत ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। मनोज राज 13 जून 2026