वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को ईरान से हासिल करना चाहते थे, तेहरान ने उनके साथ एक ऐसा खेला कर दिया है जिससे अब अमेरिका को बाहर निकालना लगभग नामुमकिन हो गया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अपने इस्फहान परमाणु परिसर की उन सुरंगों को जानबूझकर ध्वस्त किया है जहाँ यह संवेदनशील यूरेनियम भंडार माना जाता है, साथ ही उनके प्रवेश द्वारों पर बारूदी सुरंगें भी बिछा दी हैं। लंबे समय से अमेरिका और इज़रायल के लिए चिंता का विषय रहा यह हाईली एनरिच्ड यूरेनियम अब बेहद दुर्गम हो चुका है। अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सुरंगों के ढह जाने और रास्तों में बारूदी सुरंगें बिछाए जाने के कारण अब किसी भी पक्ष के लिए वहाँ पहुँचना बेहद जोखिम भरा हो गया है, यहाँ तक कि खुद ईरान के लिए भी वहां पहुंचा खतरे से खाली नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने युद्ध के शुरुआती दौर में इस भंडार पर कब्जा करने के लिए ज़मीनी सैन्य अभियान तक पर विचार किया था, लेकिन अब यह विकल्प लगभग असंभव हो चुका है। इसकारण यह मुद्दा अब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम समझौते का सबसे बड़ा पेंच बन गया है। अमेरिका की शर्त है कि ईरान को अपने यूरेनियम भंडार को देश से बाहर निकालना होगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सुरंगों के बंद होने के बाद ईरान दावा कर सकता है कि कुछ यूरेनियम तक पहुँचना संभव नहीं है। पूर्व अमेरिकी परमाणु अधिकारी स्कॉट रोएकर ने कहा है कि अगर ईरान ऐसा दावा करता है, तब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास इसकी पुष्टि करने का कोई आसान तरीका नहीं होगा, जिससे भविष्य में ईरान पर परमाणु सामग्री छिपाने का संदेह बना रह सकता है। उधर, अमेरिका यह स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी प्रस्तावित समझौते में ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को नष्ट करने और फिर देश से बाहर ले जाने की व्यवस्था शामिल होगी। हालाँकि, ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है, जबकि अमेरिका और इज़रायल का आरोप है कि तेहरान परमाणु हथियार बनाने के स्तर के बेहद करीब पहुँच चुका है। इस्फहान की सुरंगों में दबे यूरेनियम का यह सवाल अब सिर्फ एक परमाणु मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अमेरिका-ईरान वार्ता, युद्धविराम और पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। अब देखना होगा कि इस जटिल स्थिति से कैसे निपटा जाता है। आशीष दुबे / 13 जून 2026