2025 में 3500 करोड़पतियों ने छोड़ा भारत -निवेश-आधारित नागरिकता उद्योग 3.37 लाख करोड़ तक पहुंचा न्यूयॉर्क/नई दिल्ली(ईएमएस)। दुनिया भर में राजनीतिक अनिश्चितता, बढ़ते करों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते अमीरों के दूसरे देशों में बसने का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही नागरिकता, स्थायी निवास और निवेश आधारित माइग्रेशन से जुड़ा वैश्विक उद्योग भी तेजी से विस्तार कर रहा है। रिसर्च फर्म न्यू वल्र्ड वेल्थ के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में करीब 1.65 लाख करोड़पतियों के अपने मूल देशों को छोडक़र अन्य देशों में बसने का अनुमान है। पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 1.40 लाख रही थी, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर माना गया था। इनमें करीब 3500 भारतीय करोड़पति भी शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अमीरों के बढ़ते पलायन ने निवेश-आधारित नागरिकता और निवास कार्यक्रमों की मांग को बढ़ावा दिया है। इसी कारण इन्वेस्टमेंट-माइग्रेशन इंडस्ट्री का आकार बढक़र करीब 3.37 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो 2019 की तुलना में लगभग दोगुना है। इस क्षेत्र में दुनिया भर में 1,200 से अधिक कंपनियां सक्रिय हैं, जिनमें कानूनी फर्म, प्रॉपर्टी सलाहकार, अकाउंटेंट और निवेश फंड शामिल हैं। दुबई बना पसंदीदा ठिकाना हाल के वर्षों में दुबई करोड़पतियों के लिए सबसे आकर्षक गंतव्यों में शामिल रहा है। दक्षिण एशिया, अफ्रीका और मध्य-पूर्व के कई देशों के संपन्न लोग वहां बस रहे हैं। कम टैक्स, बेहतर कारोबारी माहौल और सुरक्षित निवेश विकल्प इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। यूरोप और अमेरिका से बढ़ा पलायन यूरोपीय देशों में संपत्ति कर बढऩे की आशंकाओं ने भी अमीरों के पलायन को गति दी है। पहली बार फ्रांस, जर्मनी और स्पेन जैसे देशों में आने वाले अमीरों की तुलना में बाहर जाने वालों की संख्या अधिक दर्ज की गई। वहीं, अमेरिका में बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण के कारण कई धनाढ्य नागरिक वैकल्पिक पासपोर्ट और निवास विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। नए कार्यक्रमों से निवेशकों को लुभाने की होड़ बढ़ती मांग को देखते हुए कई देश नए नागरिकता और निवास कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं। ग्रेनाडा, थाईलैंड, मालदीव, उजबेकिस्तान, सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनाडाइंस और नाउरू जैसे देशों ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष योजनाएं लॉन्च की हैं। अमेरिका की ईबी-5 वीजा योजना भी निवेश आधारित माइग्रेशन के प्रमुख विकल्पों में शामिल बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक संपन्न वर्ग के लिए ‘दूसरा पासपोर्ट’ और ‘वैकल्पिक निवास’ केवल सुविधा नहीं, बल्कि वित्तीय और रणनीतिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन बन सकता है। विनोद उपाध्याय / 13 जून, 2026