मंडला (ईएमएस)। मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाले स्व-सहायता समूहों पर आजीविका परियोजना से जुडऩे की अनिवार्यता के मौखिक आदेश के खिलाफ रसोईया उत्थान संघ समिति ने मोर्चा खोल दिया है। इस बाध्यता को समाप्त करने की मांग को लेकर शुक्रवार को जनपद पंचायत मोहगांव के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया। संगठन के संस्थापक पीडी खैरवार ने बताया कि हाल ही में एक प्रशिक्षण बैठक के दौरान समूहों को आजीविका परियोजना से जुडऩे के मौखिक निर्देश दिए गए हैं, जिससे महिलाओं में भय का माहौल है। आजीविका मिशन के कर्मचारियों द्वारा समूहों को सलाह दी जा रही है कि खाद्यान्न लागत राशि मिलने में होने वाली देरी से बचने के लिए वे बैंक से कर्ज लेकर मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम चलाएं। इसके विपरीत रसोइयों का साफ कहना है कि उन्हें कर्ज लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्हें स्थानीय किराना और सब्जी दुकानदारों से आसानी से उधारी पर सामग्री और जरूरत पडऩे पर नकद राशि मिल जाती है। महिलाओं ने चिंता जताई कि क्षेत्र के सैकड़ों समूह पहले ही कर्जदार बनकर डिफाल्टर हो चुके हैं, जिसका कोई समाधान नहीं निकला है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि एमडीएम संचालक समूह पहले से ही घाटे में चल रहे हैं। आवंटन समय पर नहीं मिलता और जो राशि मिलती है, वह भी छात्रों की औसत उपस्थिति के कारण कम होती है। इसके अलावा, राष्ट्रीय पर्वों और विशेष आयोजनों पर बिना किसी अतिरिक्त बजट के विशेष भोजन तैयार करना पड़ता है। समूहों के कम से कम 10 सदस्य इस काम में अपना समय देते हैं, लेकिन उन्हें कोई मानदेय नहीं मिलता। बाजार से सामग्री लाना, राशन दुकान से खाद्यान्न ढोना, गैस सिलेंडर का प्रबंधन और ऑडिट जैसे तमाम कार्य बिना किसी वित्तीय सहयोग के करने पड़ते हैं। इस समस्या के निराकरण के लिए रसोइयों ने आगामी मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर की जनसुनवाई में आवेदन देने का निर्णय लिया है। इस मुहिम को क्षेत्र के जनपद सदस्य हल्कू सिंह और सरपंच संघ के ब्लॉक अध्यक्ष रम्मू सिंह कुलस्ते का भी समर्थन मिला है। ज्ञापन सौंपने के दौरान सुरेश बघेल, अनीता धुर्वे, गीताबाई, समनियालाई सहित बड़ी संख्या में समूह की महिलाएं उपस्थित रहीं। ईएमएस/मोहने/ 13 जून 2026