क्षेत्रीय
13-Jun-2026
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- शिक्षकों का पाँच दिवसीय मल्टी-कैटेगरी प्रशिक्षण शासकीय मॉडल स्कूल कुड़ामैली में 185 शिक्षकों को मिला विशेष प्रशिक्षण नारायणगंज (ईएमएस)। आकांक्षी विकासखण्ड योजना के अंतर्गत चयनित विकासखण्ड नारायणगंज में जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार समावेशित शिक्षा के तहत शिक्षकों का पाँच दिवसीय मल्टी-कैटेगरी प्रशिक्षण कार्यक्रम 9 जून 2026 से 13 जून 2026 तक शासकीय मॉडल स्कूल कुड़ामैली में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्रद्धा सोनी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। विकासखण्ड एमआरसी शेख इरफान ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम में सीडब्ल्यूएसएन (दिव्यांग) बच्चों को शिक्षित करने वाले 173 शिक्षकों तथा 12 जन शिक्षकों सहित कुल 185 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थियों के शिक्षकों को समावेशी शिक्षा की अवधारणा, ब्रेल लिपि, सांकेतिक भाषा तथा विशेष शिक्षण तकनीकों की जानकारी प्रदान करना था। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि दिव्यांग बच्चों का विद्यालयों में सामान्य बच्चों की तरह नामांकन सुनिश्चित किया जाए तथा उनकी विशेष आवश्यकताओं को समझते हुए उनके साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार किया जाए। साथ ही, बच्चों को सहज एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर उनकी शैक्षणिक प्रगति को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में ब्रेल लिपि के उपयोग, सांकेतिक भाषा के व्यावहारिक प्रशिक्षण, बच्चों के अधिगम स्तर के मूल्यांकन, व्यक्तिगत शैक्षिक कार्यक्रम (आईईपी) के निर्माण एवं क्रियान्वयन तथा 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की पहचान और उनके अनुरूप शिक्षण पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने शिक्षकों को दिव्यांग विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ने, उनमें आत्मविश्वास विकसित करने तथा हर प्रकार की प्रतियोगिता और गतिविधि में समान अवसर प्रदान करने के लिए प्रेरित किया। जिला परियोजना समन्वयक कुलदीप कटहल द्वारा समावेशित शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा हैं. इस अवसर पर जिले के समावेशित शिक्षा प्रभारी सहायक परियोजना समन्वयक के.के. उपाध्याय ने कहा कि समावेशित शिक्षा केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक बच्चे को समान अवसर प्रदान करने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग विद्यार्थियों में अपार प्रतिभा होती है, आवश्यकता केवल उन्हें उचित मार्गदर्शन, सहयोग और अनुकूल वातावरण प्रदान करने की है। शिक्षक यदि संवेदनशीलता और धैर्य के साथ कार्य करें तो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। उन्होंने सभी शिक्षकों से समावेशी शिक्षा की भावना को विद्यालय स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने तथा प्रत्येक बच्चे को मुख्यधारा से जोड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं बीआरसी कमलेश भवेदी ने कहा कि समावेशित शिक्षा का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को व्यवहारिक एवं उपयोगी जानकारी प्रदान की गई है, जिससे वे बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझते हुए बेहतर शिक्षण कार्य कर सकेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचेगा और समावेशी शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षा समिति के अध्यक्ष अविनाश शर्मा ने उपस्थित होकर शिक्षकों को मार्गदर्शन दिया तथा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनरों के रूप में संदीप सोनी (एमआरसी मंडला), प्रशांत वैद्य (एमआरसी मंडला), अरविंद यादव (एमआरसी बीजाड़ांडी), सीमा यादव (एमआरसी बीजाड़ांडी), शेख इरफान (एमआरसी नारायणगंज), पंकज उईके (प्राथमिक शाला पिण्डरई), शंकरिया उईके (प्राथमिक शाला पटेहरा) एवं शालिनी ठाकुर (प्राथमिक शाला ग्वारामाल) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए प्रशिक्षण प्रदान किया। समापन समारोह में जिले के समावेशित शिक्षा प्रभारी के.के. उपाध्याय, शासकीय महाविद्यालय कुड़ामैली के प्राचार्य एडमोन लकणा, मॉडल स्कूल कुड़ामैली के प्राचार्य चितामणि वैष्णव, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी राजेश विश्वकर्मा, बीआरसी कमलेश भवेदी, बीएसी चरनलाल झारिया, राजीव वर्मा, नवनीता दुबे सहित अन्य अधिकारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्राचार्य एडमोन लकणा ने कहा कि समावेशित शिक्षा का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों में हीनता की भावना को समाप्त कर उन्हें समाज और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के समापन अवसर पर वक्ताओं ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसी संदर्भ में स्वामी विवेकानंद का प्रसिद्ध कथन भी साझा किया गया— ईश्वर जिन्हें चाहता है, उन्हें माता-पिता बना देता है और जिन्हें वह अधिक चाहता है, उन्हें शिक्षक बना देता है। इस प्रेरणादायक संदेश के साथ शिक्षकों से अपेक्षा की गई कि वे समर्पण, संवेदनशीलता और धैर्य के साथ विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करें तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। विकासखण्ड एमआरसी शेख इरफान ने कहा कि समावेशित शिक्षा का मूल उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को उसकी आवश्यकता और क्षमता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चे किसी भी दृष्टि से अन्य बच्चों से कम नहीं हैं, आवश्यकता केवल उन्हें सही अवसर, उचित मार्गदर्शन और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण प्रदान करने की है। इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को व्यवहारिक ज्ञान, नवीन शिक्षण तकनीकों, ब्रेल लिपि, सांकेतिक भाषा तथा व्यक्तिगत शैक्षिक कार्यक्रम (आईईपी) की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षित शिक्षक अपने विद्यालयों में समावेशी शिक्षा की भावना को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करेंगे, जिससे सीडब्ल्यूएसएन (दिव्यांग) बच्चों का शैक्षणिक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने प्रशिक्षण को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करने वाले अधिकारियों, मास्टर ट्रेनरों तथा सभी प्रतिभागी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। ईएमएस/मोहने/ 13 जून 2026