अपराध नियंत्रण में गेम चेंजर साबित होगा सिस्टम प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह के समक्ष दिया प्रजेंटेशन बालाघाट (ईएमएस). पुलिस ने पारंपरिक वायरलेस और कागजी व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए आधुनिक तकनीक आधारित पेट्रोलिंग मेनेजमेंट सिस्टम (पीएमएस) लागू कर स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस डिजिटल पहल से न केवल गश्त व्यवस्था मजबूत हुई है, बल्कि अपराध नियंत्रण और निगरानी भी पहले से अधिक प्रभावी हो गई है। स्थानीय कंट्रोल रुम में 13 जून को बालाघाट जिले के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह के समक्ष पुलिस द्वारा पीएमएस का विस्तृत प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया गया। इस दौरान सिस्टम की कार्यप्रणाली और उसके फायदे बताए गए। प्रस्तुति से प्रभावित होकर प्रभारी मंत्री ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि यह प्रणाली अपराधियों पर नजर रखने, उन्हें पकडऩे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अत्यंत सहायक साबित हो रही है। उन्होंने इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू करने की बात कही। बालाघाट पुलिस की यह पहल दिखाती है कि तकनीक के उपयोग से पारंपरिक पुलिसिंग को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। पीएमएस आधारित स्मार्ट पेट्रोलिंग न केवल पुलिस आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आमजन के विश्वास को भी मजबूत कर रही है। कार्यक्रम में सांसद भारती पारधी, विधायक गौरव सिंह पारधी, राजकुमार कर्राहे, पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन, कलेक्टर मृणाल मीना, पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। पहले क्या थी स्थिति? कुछ समय पहले तक जिले में रात्रि गश्त, वाहन चेकिंग और संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी मुख्य रूप से वायरलेस संचार और रजिस्टरों पर आधारित थी। गश्ती दलों की लोकेशन जानने में समय लगता था और जानकारी का विश्लेषण करना चुनौतीपूर्ण होता था। तकनीक ने बदली तस्वीर नई प्रणाली के तहत गश्त के लिए निर्धारित रूट और महत्वपूर्ण पॉइंट्स तय किए गए हैं, जिनमें बाजार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, होटल, लॉज और संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं। अब गश्ती दल इन स्थानों पर डिजिटल उपस्थिति दर्ज करते हैं, जिससे हर गतिविधि का रिकॉर्ड तैयार हो रहा है और पारदर्शिता बढ़ी है। लाइव मॉनिटरिंग से बढ़ी जवाबदेही पीएमएस की लाइव लोकेशन ट्रैकिंग सुविधा के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारी वास्तविक समय में गश्ती दलों की निगरानी कर रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति में नजदीकी टीम को तुरंत मौके पर भेजा जा सकता है, जिससे प्रतिक्रिया समय कम हुआ है। डिजिटल निगरानी से मजबूत सुरक्षा सिस्टम के माध्यम से जेल से रिहा व्यक्तियों की निगरानी, संदिग्ध व्यक्तियों का रिकॉर्ड, होटल-लॉज चेकिंग और वीआईपी ड्यूटी की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रतिदिन 70-80 लोगों की जानकारी पीएमएस में दर्ज की जा रही है, जिससे विश्लेषण और कार्रवाई आसान हुई है। क्यूआर कोड से जनता की भागीदारी थानों में क्यूआर कोड फीडबैक सिस्टम लागू किया गया है, जिससे नागरिक सीधे पुलिस सेवाओं पर फीडबैक दे सकते हैं। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार आया है। सकारात्मक परिणाम पीएमएस के लागू होने से रात्रि गश्त अधिक प्रभावी हुई है, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की उपस्थिति बढ़ी है और चोरी जैसे अपराधों पर नियंत्रण मजबूत हुआ है।