नई दिल्ली (ईएमएस)। क्या आप जानते है, दिनभर तेज धूप और भीषण गर्मी पड़ने के बाद अचानक मौसम क्यों बदल जाता है। पहले हवा थम जाती है, फिर धूल का गुबार उठता है, तेज आंधी चलने लगती है और कुछ ही देर में बारिश या ओलावृष्टि शुरू हो जाती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे बदलाव के पीछे मौसम विज्ञान की एक जटिल और रोचक प्रक्रिया काम करती है। आंधी और तूफान की शुरुआत सूरज की तेज गर्मी से होती है। जब धरती लगातार धूप से तपती है, तो रेत, पत्थर और डामर जैसी सतहों का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है। इसके कारण जमीन के पास की हवा भी गर्म होकर हल्की हो जाती है और तेजी से ऊपर उठने लगती है। मौसम वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को संवहन या कन्वेक्शन कहते हैं। जब बड़ी मात्रा में गर्म हवा ऊपर उठती है, तो जमीन के पास कम दबाव का क्षेत्र बनने लगता है। हवा हमेशा उच्च दबाव वाले क्षेत्र से निम्न दबाव वाले क्षेत्र की ओर बहती है। ऐसे में आसपास की ठंडी और भारी हवा तेजी से इस खाली स्थान को भरने के लिए दौड़ती है। यही तेज गति से चलने वाली हवा आंधी का रूप ले लेती है। उत्तर भारत में गर्मियों के दौरान बनने वाले विशाल निम्न दबाव क्षेत्र अक्सर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधियों का कारण बनते हैं। जब ऊपर उठती गर्म हवा अपने साथ नमी लेकर वातावरण की ऊंची और ठंडी परतों तक पहुंचती है, तो उसमें मौजूद जलवाष्प संघनित होकर पानी की बूंदों में बदल जाती है। यही बूंदें मिलकर विशाल क्यूमुलोनिंबस बादलों का निर्माण करती हैं। ये बादल कई किलोमीटर ऊंचाई तक फैल सकते हैं और इनके भीतर तेज ऊर्ध्वाधर हवाएं सक्रिय रहती हैं। इसी दौरान बादलों के भीतर बर्फ और पानी के कण आपस में टकराते हैं, जिससे विद्युत आवेश पैदा होता है और बिजली चमकती है। यदि बादलों के ऊपरी हिस्से में तापमान बहुत कम हो, तो पानी की बूंदें जमकर ओलों का रूप ले सकती हैं। उत्तर भारत में आंधी-तूफानों की आवृत्ति अधिक होने के पीछे भौगोलिक कारण भी हैं। यहां के विशाल समतल मैदान, शुष्क मिट्टी और थार मरुस्थल से उत्पन्न गर्म हवाएं तूफानों को तेजी से विकसित होने में मदद करती हैं। फसल कटने के बाद खुले खेतों की सूखी मिट्टी भी तेज हवाओं के साथ उड़कर धूल भरी आंधियों का रूप ले लेती है। पूर्वी भारत और बांग्लादेश क्षेत्र में अप्रैल और मई के दौरान आने वाले काल बैसाखी तूफान भी इसी प्रकार की प्रक्रिया का परिणाम होते हैं। दिनभर गर्म हुई धरती और शाम के समय बंगाल की खाड़ी से आने वाली ठंडी व नम हवाओं के टकराव से ये शक्तिशाली तूफान बनते हैं। ये तूफान तेज हवाओं, बिजली और बारिश के साथ आते हैं तथा मानसून के आगमन की भूमिका तैयार करते हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी चरम मौसमी घटनाओं की संख्या और तीव्रता बढ़ रही है। बढ़ते तापमान के कारण समुद्रों से अधिक नमी वातावरण में पहुंच रही है, जिससे आंधी, तेज बारिश और तूफानों को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है। यही वजह है कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में अचानक आने वाले तूफान और भारी वर्षा की घटनाएं अधिक देखने को मिल रही हैं। सुदामा/ईएमएस 14 जून 2026